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भारत का वो सुनसान आइलैंड, जिसकी खूबसूरती के पीछे छुपा है काला इतिहास

Wed, 11 Dec 2019 02:32 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Wed, 11 Dec 2019 02:32 PM IST
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Deserted Island India Netaji Subhash Chandra Bose Island alias Ross Island history
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड (रॉस आइलैंड) - फोटो : Social media

आज आप को ले चलते हैं एक भुतहे जजीरे की सैर पर। ये भुतहा द्वीप अंडमान निकोबार द्वीप समूह का हिस्सा है। हिंद महासागर में स्थित अंडमान निकोबार द्वीप समूह में कुल 572 द्वीप हैं। इनमें से केवल 38 में ही लोग रहते हैं। समंदर से नजदीकी की बात करें, तो अंडमान निकोबार के द्वीप भारत के बजाय दक्षिण पूर्व एशिया से ज्यादा करीब हैं। अंडमान के द्वीप अपने खूबसूरत समुद्र तटों, क़ुदरती दिलकशी, अनछुए जंगलों, दुर्लभ समुद्री जीवों और मूंगे की चट्टानों के लिए मशहूर हैं। इस खूबसूरती के पर्दे के पीछे छुपा है अंडमान का काला इतिहास। अंडमान का एक द्वीप रॉस आइलैंड, जिसे अब नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड के नाम से जाना जाता है, अपने भीतर साम्राज्यवादी इतिहास के काले-घने राज छुपाए हुए है। 

Deserted Island India Netaji Subhash Chandra Bose Island alias Ross Island history
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड (रॉस आइलैंड) - फोटो : Social media

यहां पर उन्नीसवीं सदी के ब्रिटिश राज के खंडहर, इस द्वीप और हिंदुस्तान के एक काले अध्याय के गवाह के तौर पर मौजूद हैं। रॉस आइलैंड में शानदार बंगलों, एक विशाल चर्च, बॉलरूम और एक कब्रिस्तान के खंडहर हैं, जिनकी हालत दिन-ब-दिन खराब हो रही है। तेजी से बढ़ रहे जंगल, इन खंडहरों को अपने आगोश में ले रहे हैं।  

Deserted Island India Netaji Subhash Chandra Bose Island alias Ross Island history
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड (रॉस आइलैंड) - फोटो : Social media

1857 में भारत की आजादी के पहले संग्राम के बाद ब्रिटिश साम्राज्य ने बागियों को अंडमान के सुदूर द्वीपों पर लाकर कैद रखने की योजना बनाई। 1858 में 200 बागियों को लेकर एक जहाज अंडमान पहुंचा। उस वक्त सारे के सारे द्वीप घने जंगलों से आबाद थे। इंसान के लिए वहां रहना मुश्किल था। महज 0.3 वर्ग किलोमीटर के इलाके वाला रॉस आइलैंड इन कैदियों को रखने के लिए चुना गया पहला जजीरा था। इसकी वजह ये थी कि यहां पर पीने का पानी मौजूद था। लेकिन इस द्वीप के जंगलों को साफ करके इंसानों के रहने लायक बनाने की जिम्मेदारी उन्हीं कैदियों के कंधों पर आई। इस दौरान ब्रिटिश अधिकारी जहाज पर ही रह रहे थे।  

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Deserted Island India Netaji Subhash Chandra Bose Island alias Ross Island history
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड (रॉस आइलैंड) - फोटो : Social media

धीरे-धीरे अंग्रेजों ने अंडमान में और राजनैतिक कैदियों को लाकर रखना शुरू कर दिया। और जेलें और बैरकें बनाने की जरूरत पड़ी। इसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने रॉस आइलैंड को अंडमान का प्रशासनिक मुख्यालय बनाने की ठानी। बड़े अफसरों और उनके परिवारों के रहने के लिए रॉस आइलैंड को काफी विकसित किया गया। 

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Deserted Island India Netaji Subhash Chandra Bose Island alias Ross Island history
नेताजी सुभाष चंद्र बोस आइलैंड (रॉस आइलैंड) - फोटो : Social media

अंडमान के द्वीपों पर बहुत सारी बीमारियां फैलती रही थीं। इससे अंग्रेज अधिकारियों और उनके परिजनों को बचाने के लिए रॉस आइलैंड में बेहद खूबसूरत इमारतें बनाई गईं। शानदार लॉन विकसित किए गए। बढ़िया फर्नीचर से बंगले आबाद हुए। टेनिस कोर्ट भी बनाए गए। बाद में यहां एक चर्च और पानी साफ करने का प्लांट भी बनाया गया। इसके अलावा रॉस आइलैंड पर सेना के बैरक और एक अस्पताल भी बनाया गया। बाद में डीजल जेनरेटर वाला एक पावरहाउस भी यहां बनाया गया ताकि यहां आबाद लोगों के लिए रौशनी का इंतजाम हो सके। इन सुविधाओं की वजह से रॉस आइलैंड चारों तरफ बिखरे तबाही के मंजर के बीच चमकता सितारा बन गया। 

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