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कौन है जानवरों की दुनिया में सुपरपावर?

Fri, 27 May 2016 04:45 PM IST
डेविड कॉक्स
डेविड कॉक्स Updated Fri, 27 May 2016 04:45 PM IST
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Snakes are the superpowers of the jungle

आपने सुना होगा कि अमेरिका आज दुनिया की इकलौती सुपरपावर है। किसी दौर में सोवियत संघ भी सुपरपावर कहा जाता था। चीन आज उभरती महाशक्ति है। भारत के बारे में भी कहा जाता है कि उसमें महाशक्ति बनने की क्षमता है। मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि जानवरों के बीच कौन है जिसे सुपरपावर कहा जा सकता है? अगर आप ये अंदाजा लगा रहे हैं कि शेर, बाघ या चीता, जंगल की दुनिया के सुपरपावर हैं तो आपका अंदाजा बिल्कुल गलत है।

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जानवरों की दुनिया के सुपरपावर हैं, सांप। जो सबसे खतरनाक, शातिर शिकारी होते हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया के जंगलों में मिलने वाला वेस्टर्न डायमंडबैक रैटलस्नेक, दुनिया का सबसे सब्र वाला शिकारी है। ये अकेले, छुपकर रहते हैं। बड़े इत्मीनान से अपने शिकार का इंतजार करते हैं। कई बार ये इंतजार दो बरस लंबा तक हो सकता है। यानी ये सांप दो साल तक बिना कुछ खाए रह लेते हैं। लेकिन जैसे ही मौका आता है, ये सांप बहुत भयानक तरीके से अपने शिकार पर हमला करते हैं।
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इनका शिकार पकड़ने में कामयाब होना करीब-करीब तय होता है। इनका सबसे खतरनाक हथियार इनकी ताकत नहीं, रफ्तार होती है। इस साल मार्च में छपे एक रिसर्च के मुताबिक, अपने शिकार पर सांप का हमला महज 44 से 70 मिलीसेकेंड में खत्म हो जाता है। वो कितना कम वक्त लेते हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि हमें अपनी आंखें झपकाने में भी 200 मिलीसेकेंड लगते हैं। इतने में कोई सांप चार बार अपने शिकार पर हमला कर चुकेगा।

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Snakes are the superpowers of the jungle

ये रफ्तार हमारी कल्पना से भी परे है। हम जिस तेजी से अपना कोई भी अंग हिला-डुला सकते हैं, उससे कई गुना तेज रफ्तार से सांप शिकार पर हमला बोलते हैं। अगर हम सांप जैसी फुर्ती दिखाएं तो हम गश खाकर गिर पड़ेंगे। हमारा दिमाग उतनी रफ्तार का झटका ही नहीं बर्दाश्त कर सकता।

अमेरिका की लूसियाना यूनिवर्सिटी के डेविड पेनिंग ने सांपों के बारे में काफी रिसर्च की है। वो कहते हैं कि सांपों के हमले में शिकार का बचना करीब-करीब नामुमकिन है। पेनिंग ने महीनों तक, अमेरिकी रैटलस्नेक के शिकार करने के तरीके पर नजर रखी है। इसके अलावा भी पेनिंग ने कई जहरीले और बिना विषहीन सांपों के बारे में रिसर्च की है। वो कहते हैं कि सांप जितनी देर में शिकार पर हमला करता है, उतनी देर में तो शिकार को भनक तक नहीं लगती कि उस पर हमला हुआ है।

दुनिया में सांपों की करीब साढ़े तीन हजार नस्लें पायी जाती हैं। इनमें छोटे से वाइपर्स से लेकर बड़े-बड़े अजगर तक शामिल हैं। मगर इनके बारे में ज्यादा पड़ताल नहीं की गई है। लेकिन, जिन पर भी रिसर्च किया गया है, उन सभी में गजब की रफ्तार देखी गई है।

सांपों की सबसे बड़ी खूबी ये है कि उनके शरीर में ढेरों मांसपेशियां होती हैं। एक इंसान के बदन में औसतन 700 से 800 मांसपेशियां होती हैं। वहीं छोटे से छोटे सांप के भी दस से पंद्रह हजार मांसपेशियां होती हैं।

Snakes are the superpowers of the jungle

हमें अभी ये नहीं मालूम कि सांप फुर्ती से हमला करने के लिए इन मांसपेशियों का किस तरह से फायदा उठाते हैं। कुछ लोग मानते हैं कि सांपों की सभी मांसपेशियां एक दूसरे से जुड़ी होती हैं। इसीलिए जब वो हमला करता है तो वो एकसाथ एक रबर बैंड की तरह तनकर फुर्ती से हमला करने की ताकत देती हैं।

सांपों की फुर्ती को लेकर एक बात जो समझ से परे है वो ये कि जिस रफ्तार से वो शिकार पर झपटते हैं, उसका असर खुद उन पर भी पड़ता है। आखिर वो कैसे इस झटके को बर्दाश्त करते हैं? क्योंकि उनकी जो रफ्तार होती है, उस रफ्तार में दौड़ने पर किसी दूसरे जानवर की जान जानी तय है।

अमरीकी वैज्ञानिक डेविड पेनिंग कहते हैं कि सांप 30G तक की ताकत से अपने शिकार पर झपटते हैं। मतलब ये कि जितनी ताकत से धरती हमें अपनी तरफ खींचती है उससे तीस गुनी ताकत से सांप अपने शिकार पर झपटते हैं।

उनके मुकाबले 8G की रफ्तार में ही लड़ाकू विमानों के पायलटों के पैर सुन्न होने लग जाते हैं, जब वो हवा में तेजी से गोते लगाते हैं। अगर यही रफ्तार 10G तक पहुंच गई तो उनके बेहोश होने का डर रहता है। वहीं सांप उससे भी तीन गुनी ताकत से हमला करते हैं।

Snakes are the superpowers of the jungle

वैसे कुछ गिरगिट और सैलेमैंडर, अपनी जीभ से और भी तेजी से झपट्टा मारकर शिकार पकड़ते हैं। लेकिन, उनमें और सांपों में फर्क ये होता है कि गिरगिटों और सैलेमैंडर के दिमाग नहीं सिर्फ जीभ स्पीड में होते हैं। वहीं सांप जब हमला करता है तो उसका दिमाग भी पूरे बदन के साथ ही रफ्तार में होता है।

दिमाग बहुत नाजुक अंग है। आम तौर पर किसी और जीव का दिमाग इतनी तेज रफ्तार या झटका नहीं बर्दाश्त कर सकता। जब फाइटर पायलट तेज रफ्तार से हवा में उड़ते हैं तो उनके बदन में खून की दौड़ान उनके पैरों की तरफ हो जाती है अगर ये खून लौटकर दिमाग को सप्लाई नहीं होता, तो उनके बेहोश होने का डर रहता है। दिमाग को चोट पहुंच सकती है।

लेकिन सांप, फुर्ती से हमला करते वक्त, अपने दिमाग को लगने वाले झटके भी झेल जाते हैं। वैज्ञानिक कहते हैं कि ऐसा उनकी खोपड़ी की बनावट की वजह से होता है। उनकी खोपड़ी में कई जोड़ होते हैं। जो रफ्तार से हमले के वक्त झटके बर्दाश्त कर लेती है और उनके दिमाग को नुकसान नहीं होने देती।

Snakes are the superpowers of the jungle

अब वैज्ञानिक ये समझने में लगे हैं कि कैसे सांप की हड्डियां और उसका नर्वस सिस्टम, इतनी तेज रफ्तार के झटके झेलते हैं। उसे समझकर इंसानों को भी ऐसे झटकों की सूरत में बचाने के उपाय तलाशने की कोशिश की जा रही है।

कुछ लोग तो इस जानकारी की मदद से ऐसी गाड़ियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो बहुत तेज रफ्तार में होने वाले हादसों के झटके सह सकें और इंसानों को नुकसान होने से बचा सकें।

डेविड पेनिंग कहते हैं कि अभी वो ये समझ रहे हैं कि शिकार से टकराने पर सांप को जो झटका लगता है वो उससे कैसे निपटता है। कई बार ये भी होता है कि फुर्ती से हमला करने वाले सांप को पीछे भी हटना पड़ता है। इन हालात से वो कैसे निपटता है? ये समझने की कोशिश भी की जा रही है। ताकि इसे इंसान के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

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