बंकर अक्सर सरहदों पर मिलते हैं, जो दुश्मनों के हमले से किसी देश की हिफाजत और मोर्चेबंदी का काम करते हैं। पर, दुनिया में एक देश ऐसा भी है, जहां कदम-कदम पर बंकर मिलते हैं। इस देश का नाम है अल्बानिया। इसी देश में मदर टेरेसा का जन्म हुआ था। पर, कई दशकों के कम्युनिस्ट शासन के दौरान ये मुल्क बाकी दुनिया से पूरी तरह से अलग-थलग रहा। इसके वामपंथी तानाशाह एनवर होक्सहा को दुश्मनों का ऐसा खौफ हुआ कि उसने पूरे देश में बंकर बनवा डाले।
2 of 17
अल्बानिया में बने बंकर
- फोटो : Social media
अल्बानिया के गाइड एल्टन कॉशी मजाक में कहते हैं कि आज ये बंकर टूरिज्म के विस्तार का जरिया बन गए हैं। यूं तो अल्बानिया का हजारों साल पुराना इतिहास है। पर आज चालीस साल पुराना इतिहास, हजारों साल की विरासत पर भारी पड़ रही है। आप अल्बानिया के एड्रियाटिक तट से देश के भीतरी हिस्से की तरफ बढ़ें, तो कदम-कदम पर बंकर बने हुए दिखेंगे। दीवारों के ऊपर गोलाकार ताज सा रखा हुआ है।
3 of 17
अल्बानिया का तानाशाह एनवर होक्सहा
- फोटो : Social media
ये बंकर 1970 के दशक में बनाए गए थे। उस वक्त अल्बानिया दुनिया से पूरी तरह से कटा हुआ देश था। इन्हें बनाने की सनक तानाशाह एनवर होक्सहा को उस वक्त चढ़ी, जब अल्बानिया के रिश्ते सोवियत संघ से खराब हो गए। एनवर को लगता था कि पड़ोसी देशों युगोस्लाविया और यूनान से लेकर अमेरिका और सोवियत संघ तक, हर मुल्क उनके वतन पर चढ़ाई करने वाला है। इसी डर से एनवर होक्सहा ने पूरे देश की हिफाजत के लिए बंकर बनवाने शुरू कर दिए।
4 of 17
अल्बानिया में बने बंकर
- फोटो : Social media
ये बंकर व्लोर की खाड़ी से लेकर राजधानी तिराना की पहाड़ियों तक पर बनाए गए हैं। मोंटेनीग्रो की सीमा से लेकर यूनान के द्वीप कोर्फू तक ये बंकर बने हुए हैं। मोटे अंदाजे के मुताबिक, पूरे देश में करीब पौने दो लाख बंकर एनवर होक्सहा के राज में बनवाए गए थे। आज भी ये बंकर पूरे देश में बिखरे हुए हैं। पहाड़ियों से लेकर खेतों तक, हाइवे से लेकर समुद्र तट तक बंकरों का बोलबाला है।
5 of 17
अल्बानिया में बने बंकर
- फोटो : Social media
कहा जाता है कि एक बंकर बनाने में दो बेडरूम का मकान बनाने के बराबर खर्च आया होगा। इन्हें बनाने की वजह से ही अल्बानिया यूरोप का सबसे गरीब देश बन गया। इन बंकरों की ऐसी आर्थिक विरासत बनी जिसका बोझ अल्बानिया के लोग आज भी उठा रहे हैं। असल में एनवर होक्सहा ने अपने देश के लोगों को एक मंत्र दिया था-हमेशा तैयार रहो। उसका ये मिजाज दूसरे विश्व युद्ध में मिले तजुर्बे से बना था।