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फ्लेक्स-फ्यूल: नितिन गडकरी ने क्यों कहा- 'पेट्रोल का चेहरा ही नहीं देखना हमको', क्या कार कंपनियां हैं तैयार?

Sun, 07 Jun 2026 04:12 PM IST
Suyash Pandey ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Suyash Pandey Updated Sun, 07 Jun 2026 04:12 PM IST
सार

Nitin Gadkari on Petrol: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मारुति और हीरो के 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहनों को लॉन्च कर दिया है। साथ ही उन्होंने पेट्रोल-डीजल की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने का भी एलान किया है। गडकरी ने दो-टूक कहा कि 'हमें पेट्रोल का चेहरा ही नहीं देखना है'। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या भारतीय वाहन निर्माता कंपनियां इसके लिए तैयार हैं? आइए जानते हैं कार कंपनियों की फ्लेक्स-फ्यूल को लेकर क्या तैयारी है।

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Why Gadkari Wants to 'End' Petrol, and How Car Companies Are Preparing
नितिन गडकरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने फ्लेक्स फ्यूल यानी 100% इथेनॉल से चलने वाले वाहन लॉन्च कर दिए हैं। अब भारतीय सड़कों पर ऐसी कारें दौड़ने के लिए तैयार हैं जो 100% इथेनॉल से चलेंगी। हाल ही में गडकरी ने मारुति सुजुकी की वैगनआर और हीरो मोटोकॉर्प की एचएफ डीलक्स और स्पलेंडर प्लस के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन लॉन्च किए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि 'हमें पेट्रोल का चेहरा ही नहीं देखना है'। लेकिन क्या 100% इथेनॉल को लेकर ऑटो कंपनियां असल में तैयारी हैं, आइए जानते हैं।

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"पेट्रोल का चेहरा ही नहीं देखना है..."

मारुति सुजुकी वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल की लॉन्चिंग इवेंट के दौरान नितिन गडकरी ने पेट्रोल और डीजल के बढ़ते इस्तेमाल पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए कहा, "पूरा 100% पेट्रोल बंद हो जाएगा, यह पेट्रोल का चेहरा ही नहीं देखना है हमको। हम तो इसको कब बंद करेंगे इसके पीछे लगे हैं क्योंकि प्रदूषण है और आर्थिक समस्या भी है।" उनका यह बयान साफ करता है कि सरकार का लक्ष्य जल्द से जल्द पेट्रोल-डीजल की जगह स्वदेशी और स्वच्छ ईंधन को मुख्यधारा में लाना है।

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भारत में 100% इथेनॉल को लेकर कौन-कौन सी कंपनियां हैं रेस में?

फ्लेक्स-फ्यूल और 100% इथेनॉल (E100) के लक्ष्य को साधने के लिए देश की कुछ ऑटोमोबाइल कंपनियां पूरी तरह तैयार हैं, वहीं कुछ तैयारी में हैं। कुछ कंपनियों ने अपने मॉडल लॉन्च कर दिए हैं, तो कुछ जल्द ही इन्हें बाजार में उतारने वाली हैं:

मारुति सुजुकी: कंपनी ने आधिकारिक तौर पर भारत की पहली E100 अनुकूल कार वैगनआर फ्लेक्स फ्यूल पेश कर दी है। ये 100% शुद्ध इथेनॉल तक किसी भी ब्लेंड पर चलने में सक्षम है। भविष्य के लिए कंपनी ने फ्रोंक्स का फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप भी तैयार कर रखा है।

हीरो मोटोकॉर्प: टू-व्हीलर सेगमेंट में हीरो ने बाजी मारते हुए अपनी मशहूर बाइक्स स्पलेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन लॉन्च कर दिए हैं, जो 100% इथेनॉल पर चलने के लिए तैयार हैं।

टाटा मोटर्स: कंपनी ने अपनी लोकप्रिय माइक्रो-एसयूवी पंच का फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप शोकेस किया है। 2026 के अंत या 2027 तक इसके पैसेंजर वाहन बाजार में आने की उम्मीद है।

ह्यूंदै: कंपनी ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली एसयूवी क्रेटा का फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश किया है। इसके इंजन को खास तौर पर E100 पर सुचारू रूप से चलने के लिए बदलाव किए जा रहे हैं।

टोयोटा: कंपनी फ्लेक्स-फ्यूल और हाइब्रिड दोनों तकनीकों को मिला रही है। कंपनी कोरोला हाइब्रिड और इनोवा हाइक्रॉस के फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही है।

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प्रदूषण और 23 लाख करोड़ का इंपोर्ट बिल होगा खत्म

नितिन गडकरी ने इस बात पर चिंता जताई कि हमारे देश के 40% वायु प्रदूषण के लिए ट्रांसपोर्ट सेक्टर जिम्मेदार है। आर्थिक मोर्चे पर भी भारत हर साल 22 से 23 लाख करोड़ रुपये फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल-डीजल) के आयात पर खर्च करता है। फ्लेक्स-फ्यूल के इस्तेमाल से प्रदूषण में भारी कमी आएगी और इस विशाल आयात बिल को कम करके भारत ऊर्जा निर्यातक बन सकेगा।

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री बना भारत

गडकरी ने ऑटो सेक्टर की तेज तरक्की की तारीफ करते हुए बताया कि जब उनकी सरकार आई थी, तब इस इंडस्ट्री का साइज 15 लाख करोड़ रुपये था, जो आज बढ़कर 23 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

  • भारत ने जापान को पीछे छोड़कर दुनिया में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है।
  • यह सेक्टर 4 करोड़ युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दे रहा है।

हाइड्रोजन, बायो-सीएनजी और भविष्य का ईंधन

  • बायो-सीएनजी: मारुति सुजुकी ने पंजाब और हरियाणा में पराली से बायो-सीएनजी बनाने वाले 5 प्लांट शुरू किए हैं। 5 टन पराली से 1 टन बायो-सीएनजी बनती है।
  • हाइड्रोजन कारें: भविष्य के ईंधन के रूप में हाइड्रोजन पर तेजी से काम हो रहा है। देश के 10 रूटों पर हाइड्रोजन फिलिंग स्टेशन और बसें चलाने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है।
  • सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF): अब भारत में हवाई जहाज भी इथेनॉल से उड़ेंगे। पानीपत में 78,000 टन सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल बन रहा है।
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