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Tesla: टेस्ला की भारत में संभावित एंट्री की चीन ने की आलोचना, जानें क्या है तिलमिलाने की असली वजह

Tue, 16 Apr 2024 09:03 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Tue, 16 Apr 2024 09:03 PM IST
सार

एलन मस्क की भारत में टेस्ला इलेक्ट्रिक वाहन प्लांट लगाने की योजना को चीन सरकार और उसके मीडिया दोनों से तीखी आलोचना मिली है। जानें क्या है इसकी असली वजह।

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Tesla's venture in Indian market draws criticism from Chinese government Know why
Elon Musk and PM Modi - फोटो : X/@PMOIndia

विस्तार

चीन इस बात से खीज खा रहा है कि टेस्ला भारत में एक कारखाना खोलने की तैयारी में है। क्योंकि टेस्ला चीन के अलावा अपने एशियाई कारोबार में विविधता लाना चाहता है। एलन मस्क की भारत में टेस्ला इलेक्ट्रिक वाहन प्लांट लगाने की योजना को चीन सरकार और उसके मीडिया दोनों से तीखी आलोचना मिली है। दोनों ही भारतीय बाजार में टेस्ला के वेंचर की व्यवहार्यता के बारे में चिंता जताते हैं।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने के अपने इरादे की मस्क की घोषणा ने टेस्ला की महत्वाकांक्षी परियोजना के बारे में अटकलों को हवा दे दी है। जिसमें एंट्री लेवल की इलेक्ट्रिक कारों के निर्माण के लिए कई अरब डॉलर का निवेश शामिल हो सकता है। जिसे संभावित रूप से मॉडल 2 नाम दिया जा सकता है और इसकी कीमत लगभग 25 लाख रुपये हो सकती है।
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द ग्लोबल टाइम्स चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख समाचार पत्र, पीपुल्स डेली के तत्वावधान में एक दैनिक टैब्लॉइड समाचार पत्र है। द ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी सरकार के अधिकारियों को भारत की टेस्ला के कार्यों को समायोजित करने की तैयारियों पर संदेह है। उन्होंने देश के "कम तैयार" और "अपरिपक्व बाजार" के बारे में चिंता जताई है। जबकि यह दावा किया है कि देश में "ईवी के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे का अभाव है"।

द ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि तेजी से विकास के बावजूद, भारत में ईवी को अपनाना अभी भी अपनी शुरुआती अवस्था में है। क्योंकि भारत में कुल यात्री वाहन बिक्री का सिर्फ 2.3 प्रतिशत ही ईवी का योगदान है।

इसके अलावा, लेख में बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर भारत की निर्भरता की ओर इशारा किया गया है। जो जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने की अपनी क्षमता में बाधा डाल सकता है। इसने लिथियम-आयन बैटरी जैसे प्रमुख ईवी कंपोनेंट के सीमित घरेलू उत्पादन को भी रेखांकित किया। जो भारत में टेस्ला के संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण बाधा है। लेख में कहा गया है, "सबसे बड़े मुद्दों में से एक लिथियम-आयन बैटरी जैसे ईवी के लिए प्रमुख कंपोनेंट का सीमित घरेलू उत्पादन है। भारत में स्वदेशी ईवी सप्लाई चेन बनाने की कोशिश में तुलनात्मक रूप से देरी से काम शुरू हो रहा है।"

भारत सरकार ने हाल ही में एक नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति को मंजूरी दी है। जो आंशिक रूप से मस्क के लगातार अनुरोधों के जवाब में है। यह नीति स्थानीय मैन्युफेक्चरिंग शुरू करने के लिए न्यूनतम 500 मिलियन डॉलर के निवेश के बदले में पूरी तरह से निर्मित इलेक्ट्रिक कारों के आयात को पांच साल के लिए कम आयात शुल्क पर अनुमति देती है।
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गौर किया जाना चाहिए कि भारत के "कम तैयार" और "अपरिपक्व बाजार" के बारे में अपनी आलोचनाओं के बावजूद चीनी ईवी दिग्गज BYD और ग्रेट वॉल मोटर भारत में प्रमुख कारखाने स्थापित करना चाहते थे। लेकिन उन्हें नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अस्वीकार कर दिया था।

BYD हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के साथ साझेदारी में भारत में 1 अरब डॉलर का कारखाना स्थापित करने की अनुमति मांग रही थी। जिसे केंद्र सरकार ने 2023 में वापस अस्वीकार कर दिया था। इसी तरह, 2022 में, चीन की ग्रेट वॉल मोटर भारत में जनरल मोटर्स से एक मैन्युफेक्चरिंग प्लांट खरीदना चाहती थी। हालांकि, भारत सरकार ने बिक्री को रोक दिया।

टेस्ला की भारत में संभावित एंट्री पर चीन की प्रतिक्रिया वैश्विक आटोमोटिव उद्योग में व्यापक भू-राजनीतिक तनाव और प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है। भारतीय सरकार द्वारा हालिया कार्रवाई, जैसे कि BYD और ग्रेट वॉल मोटर जैसी चीनी वाहन निर्माताओं के प्रस्तावों को अस्वीकार करना, इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में घरेलू मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने और अपने रणनीतिक हितों की रक्षा करने के भारत की कोशिशों को उजागर करती है।

इन जटिलताओं को पार करते हुए, भारत में निवेश करने का टेस्ला का फैसला निस्संदेह देश के वाहन उद्योग के भविष्य के परिदृश्य और चीन जैसे प्रमुख वैश्विक दिग्गजों के साथ उसके संबंधों को आकार देगा।
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