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SC: सुप्रीम कोर्ट ने जताया आश्चर्य, देश में निर्माण कार्य होने पर क्यों दायर की जाती हैं जनहित याचिकाएं?

Fri, 02 Aug 2024 06:16 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Fri, 02 Aug 2024 06:16 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि विकास और पारिस्थितिक संतुलन साथ-साथ चलना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी गोवा में तिनैघाट-वास्को दा गामा रूट पर वास्को दा गामा-कुलेम खंड पर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के निर्माण कार्य से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

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Supreme Court wonders why PILs are filed when constructions happen in country
Supreme Court - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि विकास और पारिस्थितिक संतुलन साथ-साथ चलना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी गोवा में तिनैघाट-वास्को दा गामा रूट पर वास्को दा गामा-कुलेम खंड पर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के निर्माण कार्य से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
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शीर्ष अदालत ने कहा, "हम सिर्फ सोच रहे हैं कि ऐसा क्यों होता है कि इस देश में ही जब आप हिमाचल (प्रदेश) में एक सड़क का निर्माण शुरू करते हैं, तो पीआईएल आते हैं। जब आप एक हाईवे, नेशनल हाईवे का निर्माण शुरू करते हैं, तो पीआईएल आते हैं।"
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बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, "आप हमें एक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बताइए जहां रेलवे सुविधा न हो। अल्प्स पर्वत पर जाइए और वे आपको ट्रेन से बर्फ के बीच से वहां ले जाते हैं।"

शीर्ष अदालत गोवा उच्च न्यायालय के अगस्त 2022 के उस फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण के निर्माण से संबंधित एक पीआईएल को खारिज कर दिया गया था। 

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में आरोप लगाया था कि निर्माण कार्य 2011 के तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, गोवा सिंचाई अधिनियम, 1973, गोवा पंचायत राज अधिनियम, 1994 और गोवा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम आदि के तहत पूर्व अनुमति प्राप्त करने के वैधानिक आदेश का उल्लंघन करके किया जा रहा है।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि यह परियोजना गोवा में रेलवे नेटवर्क को मजबूत करेगी और सड़क परिवहन पर बोझ कम करने में मदद करेगी।

बेंच ने कहा, "यह एकमात्र ऐसा देश है जिसे सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना है। बाकी क्षेत्रों को भगवान ने छूट दे दी है।" 
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याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने अनियोजित विकास के खतरों को उजागार करते हुए केरल के वायनाड जिले में हाल ही हुई घटना का जिक्र किया। जिसमें भूस्खलन में 195 लोगों की मौत हो गई थी।

गोवा में रेलवे लाइन परियोजना पर बेंच ने कहा कि ऐसे विशेषज्ञ हैं जो हर चीज की जांच करेंगे।

वकील ने कहा कि रेलवे लाइन पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र से होकर गुजरती है और याचिका को विकास विरोधी जैसा कुछ नहीं माना जाना चाहिए।
 

बेंच ने कहा, "विकास और पारिस्थितिक संतुलन साथ-साथ चलना चाहिए। इसमें कोई शक नहीं है। कोई भी क्रूर विकास की अनुमति नहीं दे सकता। आखिरकार, हम कानून के शासन द्वारा शासित हैं।"

बेंच ने कहा, "हम इसे भी अच्छी तरह से जानते हैं। लेकिन फिर हमें यह देखना होगा कि क्या उन मानकों का ध्यान रखा गया है।"

बेंच ने वकील से कहा कि किसी चीज के बारे में कोई काल्पनिक या भ्रामक आशंका नहीं होनी चाहिए। 

जब वकील ने तर्क दिया कि गोवा का तट एक पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, तो बेंच ने कहा, "आपका अंतिम तर्क है कि रेलवे लाइन नहीं होनी चाहिए... जब लोग लग्जरी वाहनों में वहां जाते हैं तो आपको कोई समस्या नहीं होती है। उनके पास शानदार बंगले हैं, उनके पास बहुत सारी कारें हैं। आपको कोई समस्या नहीं है।"

इसके बाद शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
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