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Helmet: हेलमेट न पहनने पर मुआवजा देने से नहीं किया जा सकता इनकार, कर्नाटक हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
Tue, 20 Aug 2024 05:54 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 20 Aug 2024 05:54 PM IST
सार
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक हालिया फैसले में, स्पष्ट किया कि हेलमेट न पहनने से मोटर दुर्घटना में शामिल व्यक्ति को मुआवजा मिलने का अधिकार खत्म नहीं होता है। हालांकि यह कानून का उल्लंघन है।
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कर्नाटक उच्च न्यायालय
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक हालिया फैसले में, स्पष्ट किया कि हेलमेट न पहनने से मोटर दुर्घटना में शामिल व्यक्ति को मुआवजा मिलने का अधिकार खत्म नहीं होता है। हालांकि यह कानून का उल्लंघन है। यह फैसला न्यायमूर्ति के. सोमशेखर और न्यायमूर्ति चिल्लाकुर सुमलता की खंडपीठ ने दिया।
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एक्सप्रेस ड्राइव्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला रामनगर जिले के चन्नपटना शहर के निवासी सदाथ अली खान द्वारा दायर अपील से संबंधित है। जो 5 मार्च, 2016 को बंगलूरू-मैसूरु रोड पर एक दुर्घटना में शामिल थे। खान मोटरसाइकिल पर मैसूरु की ओर जा रहे थे, जब रामनगर तालुक के वादेरहल्ली गांव में एक तेज रफ्तार कार ने उनके दोपहिया वाहन को पीछे से टक्कर मार दी।
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चोटें लगने के बाद, खान ने मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल, रामनगर के सामने मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की। जिसमें उल्लेख किया गया कि उन्होंने अपने इलाज और अन्य आकस्मिक खर्चों पर 10 लाख रुपये खर्च किए हैं।
24 सितंबर, 2020 को ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता को 5.61 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश पारित किया। और कहा कि याचिकाकर्ता दुर्घटना के समय हेलमेट नहीं पहने हुए थे। हालांकि, खान ने इस आदेश को चुनौती दी और कहा कि वह हर महीने 35,000 रुपये कमाते थे। लेकिन दुर्घटना के कारण वह ऐसा करने की क्षमता खो चुके थे।
24 सितंबर, 2020 को ट्रिब्यूनल ने याचिकाकर्ता को 5.61 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश पारित किया। और कहा कि याचिकाकर्ता दुर्घटना के समय हेलमेट नहीं पहने हुए थे। हालांकि, खान ने इस आदेश को चुनौती दी और कहा कि वह हर महीने 35,000 रुपये कमाते थे। लेकिन दुर्घटना के कारण वह ऐसा करने की क्षमता खो चुके थे।
नतीजतन, कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता ने हेलमेट नहीं पहना था, फिर भी वह उचित मुआवजे का हकदार है। अदालत ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 (ए) के तहत जरूरी सुरक्षात्मक हेडगियर नहीं पहनने से सहभागी-लापरवाही होती है। लेकिन इससे याचिकाकर्ता को मिलने वाले मुआवजे पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा, "धारा 129 (ए) के तहत, सुरक्षात्मक हेडगियर नहीं पहनने के अपराध के लिए 1,000 रुपये का जुर्माना या तीन महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किया जा सकता है। इस अपेक्षाकृत मामूली दंड को देखते हुए, सुरक्षात्मक हेडगियर नहीं पहनने के लिए बीमा दावे की राशि में 10-15 प्रतिशत की कमी करना अनुचित है।"
फैसले में कहा गया है कि मुआवजे का निर्धारण दुर्घटना करने वाले प्रतिवादी की लापरवाही का आकलन करके किया जाना चाहिए। और हेलमेट न पहनना मुआवजे की राशि कम करने का एकमात्र मानदंड नहीं होना चाहिए। भले ही यह सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो।
पीठ ने दावेदार को 6,80,200 रुपये के बढ़े हुए मुआवजे का आदेश देते हुए आगे कहा, "मोटर वाहन दुर्घटनाओं में सहभागी लापरवाही की अवधारणा तब सामने आती है जब घायल पक्ष की खुद की लापरवाही दुर्घटना या चोटों की गंभीरता में योगदान देती है। ऐसे मामलों में, घायल पक्ष को दिया जाने वाला मुआवजा दोष की मात्रा के अनुपात में कम किया जा सकता है।"
आखिर में, अदालत ने यह जिक्र करते हुए निष्कर्ष निकाला कि वह इस बात का मूल्यांकन करेगी कि हेलमेट न पहनने से याचिकाकर्ता की चोटों में कितना योगदान रहा है। और अगर कोई योगदान पाया जाता है तो मुआवजे में आनुपातिक कमी कर सकती है।