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Rare Earth Minerals: ऑटो उद्योग को जल्द मिल सकती है राहत, दुर्लभ खनिज के लिए ऑस्ट्रेलिया से बातचीत तेज
Thu, 10 Jul 2025 05:37 PM IST
नीतीश कुमार
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 10 Jul 2025 05:37 PM IST
सार
दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति में चीन की बढ़ती पकड़ और संभावित संकट को देखते हुए भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ बातचीत तेज कर दी है। इसका उद्देश्य ऑटो उद्योग को सुचारु रूप से चलाने और जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
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Car Plant
- फोटो : Freepik
विस्तार
भारत सरकार ऑटो उद्योग की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दुर्लभ खनिजों यानी रेयर अर्थ मिनरल के विकल्प पर तेजी से काम कर रही है। इस दिशा में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग की बातचीत हो रही है। बताया जा रहा है कि चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात में संभावित कटौती से ऑटो कंपनियों के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी आशंका को देखते हुए सरकार ने दूसरा विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है।
ब्लॉक लेने और कंपनियों से साझेदारी का अवसर
ऑस्ट्रेलिया में भारत के व्यापार एवं निवेश आयुक्त मालिनी दत्त ने कहा कि भारत के पास वहां से ब्लॉक लेने और कुछ कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का अच्छा अवसर है। भारत के निजी और सरकारी क्षेत्रों ने इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया में गहरी रुचि दिखाई है।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी है खनिज सुरक्षा
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन की निरंतरता और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण सामग्रियों पर रणनीतिक नीति बनाना जरूरी हो गया है।
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स्वदेशी उत्पादन पर जोर
उद्योग ने वैकल्पिक समाधानों पर काम शुरू कर दिया है और यह समझा जा रहा है कि भविष्य में आत्मनिर्भर बनना ही एकमात्र समाधान है। खासकर उस स्थिति में जब चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर रोक लगाए जाने की आशंका मंडरा रही हो।
6.73 लाख करोड़ रुपये का कारोबार
ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए यह संकट बड़ा झटका साबित हो सकता है। बावजूद इसके, कंपोनेंट उद्योग ने वित्त वर्ष 2024-25 में 6.73 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जो इस क्षेत्र की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
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ब्लॉक लेने और कंपनियों से साझेदारी का अवसर
ऑस्ट्रेलिया में भारत के व्यापार एवं निवेश आयुक्त मालिनी दत्त ने कहा कि भारत के पास वहां से ब्लॉक लेने और कुछ कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का अच्छा अवसर है। भारत के निजी और सरकारी क्षेत्रों ने इस दिशा में ऑस्ट्रेलिया में गहरी रुचि दिखाई है।
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इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी है खनिज सुरक्षा
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादन की निरंतरता और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण सामग्रियों पर रणनीतिक नीति बनाना जरूरी हो गया है।
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स्वदेशी उत्पादन पर जोर
उद्योग ने वैकल्पिक समाधानों पर काम शुरू कर दिया है और यह समझा जा रहा है कि भविष्य में आत्मनिर्भर बनना ही एकमात्र समाधान है। खासकर उस स्थिति में जब चीन द्वारा दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर रोक लगाए जाने की आशंका मंडरा रही हो।
6.73 लाख करोड़ रुपये का कारोबार
ऑटो कंपोनेंट उद्योग के लिए यह संकट बड़ा झटका साबित हो सकता है। बावजूद इसके, कंपोनेंट उद्योग ने वित्त वर्ष 2024-25 में 6.73 लाख करोड़ रुपये का कारोबार किया है, जो इस क्षेत्र की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।