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जो 11 बरस नहीं हुआ, वो भी हो गया
अमर उजाला/ नई दिल्ली
Updated Fri, 10 Jan 2014 03:56 PM IST
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आर्थिक सुस्ती के चलते 11 सालों में पहली बार कारों की बिक्री घटी है। साल 2012 के मुकाबले 2013 में कारों की बिक्री में 9.59 फीसदी की गिरावट आई है।
कारों की बिक्री 9.59 फीसदी घटी
साल 2012 में देश में जहां करीब 20 लाख कारों की बिक्री हुई थी, वहीं 2013 में यह आंकड़ा घटकर 18 लाख 7 हजार पर आ गया। दिसंबर में पैसेंजर कार बिक्री में भी साढ़े चार फीसदी की गिरावट आई और इस दौरान कंपनियों ने करीब एक लाख 32 हजार गाड़ियां बेंचीं।
सिआम के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले दिसंबर 2013 में कारों की बिक्री में 4.59 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। दिसंबर 2013 में एक लाख 32 हजार 561 कारें बिकीं। दिसंबर 2012 में एक लाख 38 हजार 835 कारें बेची गईं।
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ऑटो कंपनियों को उम्मीद
रुके हुए बुनियादी प्रोजेक्ट में तेजी लाने के फैसले ने ऑटो कंपनियों में एक उम्मीद जगाई है। सियाम का मानना है कि इस कदम खनन उद्योग में फिर से उत्पादन शुरू होने और इंफ्रा प्रोजेक्ट में भारी वाहनों की बिक्री में उछाल आएगा। सरकार के जेएनएनयूआरएम योजना को विस्तार देने के फैसले से भी उद्योग को काफी उम्मीदें हैं।
ऑटो इंडस्ट्री ने दोहराई राहत पैकेज की मांग
लगातार बढ़ती महंगाई ने ऑटो कंपनियों को भी परेशान कर रखा है। इंडस्ट्री ने राहत पैकेज की मांग को फिर से दोहराया। सियाम को डर है कि अगर मंहगाई पर काबू नहीं पाया गया तो रिजर्व बैंक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसे में ग्राहक गाड़ी खरीदने की योजना टाल सकते हैं।
इसके साथ ही आगामी लोकसभा चुनावों के नतीजों को लेकर भी ऑटो इंडस्ट्री परेशान है। इंडस्ट्री का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आर्थिक विकास को पटरी पर लाने के लिए पूर्ण बहुमत की सरकार की आवश्यकता है।
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कारों की बिक्री 9.59 फीसदी घटी
साल 2012 में देश में जहां करीब 20 लाख कारों की बिक्री हुई थी, वहीं 2013 में यह आंकड़ा घटकर 18 लाख 7 हजार पर आ गया। दिसंबर में पैसेंजर कार बिक्री में भी साढ़े चार फीसदी की गिरावट आई और इस दौरान कंपनियों ने करीब एक लाख 32 हजार गाड़ियां बेंचीं।
1.57 करोड़ रुपए की इस कार में है बहुत कुछ नया
दिसंबर में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में भी 25 फीसदी की भारी गिरावट आई। हालांकि इस दौरान टू-व्हीलर्स की बिक्री में कुछ सुधार दर्ज किया और यह दो फीसदी बढ़ी है।
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सिआम के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले दिसंबर 2013 में कारों की बिक्री में 4.59 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। दिसंबर 2013 में एक लाख 32 हजार 561 कारें बिकीं। दिसंबर 2012 में एक लाख 38 हजार 835 कारें बेची गईं।
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ऑटो कंपनियों को उम्मीद
रुके हुए बुनियादी प्रोजेक्ट में तेजी लाने के फैसले ने ऑटो कंपनियों में एक उम्मीद जगाई है। सियाम का मानना है कि इस कदम खनन उद्योग में फिर से उत्पादन शुरू होने और इंफ्रा प्रोजेक्ट में भारी वाहनों की बिक्री में उछाल आएगा। सरकार के जेएनएनयूआरएम योजना को विस्तार देने के फैसले से भी उद्योग को काफी उम्मीदें हैं।
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इंडस्ट्री को सड़कों की स्थिति में लगातार हो रहे सुधार से गाड़ियों की बिक्री में बढ़ोतरी की उम्मीद है। साथ ही रुपये में सुधार से भी इंडस्ट्री ने राहत की सांस ली है।ऑटो इंडस्ट्री ने दोहराई राहत पैकेज की मांग
लगातार बढ़ती महंगाई ने ऑटो कंपनियों को भी परेशान कर रखा है। इंडस्ट्री ने राहत पैकेज की मांग को फिर से दोहराया। सियाम को डर है कि अगर मंहगाई पर काबू नहीं पाया गया तो रिजर्व बैंक ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसे में ग्राहक गाड़ी खरीदने की योजना टाल सकते हैं।
इसके साथ ही आगामी लोकसभा चुनावों के नतीजों को लेकर भी ऑटो इंडस्ट्री परेशान है। इंडस्ट्री का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आर्थिक विकास को पटरी पर लाने के लिए पूर्ण बहुमत की सरकार की आवश्यकता है।