Car Theft: क्या आपकी कार पर है किसी और की नजर? जानिए कैसे GPS लगाकर दोबारा चोरी हो रही हैं बिकी हुई गाड़ियां?
पुरानी कार खरीदते समय केवल इंजन और कंडीशन देखना काफी नहीं है। हाल ही में नोएडा पुलिस ने एक बड़े स्कैम का खुलासा किया है। इसमें ठगों ने सेकेंड हैंड कार बेचकर उसमें छिपे जीपीएस ट्रैकर और नकली चाबियों की मदद से कार दोबारा चोरी कर ली।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पुरानी कार (यूज्ड कार) खरीदना आर्थिक रूप से एक समझदारी भरा फैसला माना जाता है लेकिन अगर आप सावधानी नहीं बरतते, तो यह आपके लिए भारी पड़ सकता है। हाल ही में नोएडा पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने 'सेकेंड हैंड कार मार्केट' में सुरक्षा की एक बड़ी खामी को उजागर कर दिया है। यह गिरोह न केवल कार बेचता था बल्कि जीपीएस ट्रैकिंग और नकली चाबियों का इस्तेमाल कर उसे वापस चोरी भी कर लेता था। तो सुरक्षा के मद्देनजर इस लेख में समझेंगे कि आप अपनी कार को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
नोएडा पुलिस ने जिस गिरोह को पकड़ा है उनका तरीका बेहद शातिर था। ये लोग बैंक नीलामी (बैंक ऑक्शन) या अन्य स्रोतों से गाड़ियां खरीदते थे। इसके बाद ये दो काम करते थे। पहला ये ईसीयू/इमोबिलाइजर की क्लोनिंग करते थे। इसके लिए वे गाड़ी बेचने से पहले ये उसकी असली चाबी की नकली कॉपी बनवा लेते थे।
और दूसरा ये कार में एक छिपा हुआ जीपीएस ट्रैकर लगा देते थे। इससे ग्राहक को कार बेचने के बाद ये अपने मोबाइल पर कार की 'लाइव लोकेशन' ट्रैक करते थे। मौका मिलते ही नकली चाबी से कार को बिना कोई शोर मचाए या शीशा तोड़े, अनलॉक करके उड़ा ले जाते थे। पुलिस ने इनके पास से एक चोरी की गई टाटा नेक्सन बरामद की है।
अपनी कार को कैसे सुरक्षित रखें?
अगर आप कोई भी पुरानी कार खरीद रहे हैं तो मैकेनिक से इंजन चेक कराने के अलावा, सिक्योरिटी ऑडिट करना भी जरूरी है। इसके लिए हम आपको कुछ टेक्निकल चेकलिस्ट बताएंगे जिससे आपका काम आसान हो सकता है।
1. चाबियों का गणित समझें
आजकल की कारों में 'इमोबिलाइजर' होता है, यानी कार तभी स्टार्ट होगी जब चाबी का कोड कार के कंप्यूटर (ईसीयू) से मैच करेगा। इसीलिए कार खरीदते समय डीलर से दोनों ओरिजिनल चाबियां मांगें। अगर वह कहता है कि एक चाबी खो गई है तो सतर्क हो जाएं। कार खरीदने के तुरंत बाद ऑथोराइज्ड सर्विस सेंटर जाएं और लॉक सेट बदलवा दें या कम से कम चाबियों की रि-कोडिंग करवाएं। इससे पुरानी सभी चाबियां (जो चोरों के पास हो सकती हैं) बेकार हो जाएंगी।
2. ओबीडी पोर्ट की जांच करें
ज्यादातर 'प्लग-एंड-प्ले' जीपीएस ट्रैकर ओबीडी (ऑन-बोर्ड डायग्नोस्टिक) पोर्ट में लगाए जाते हैं। यह पोर्ट आमतौर पर स्टीयरिंग व्हील के नीचे, पैडल के पास होता है। झुककर देखें कि ओबीडी पोर्ट में कोई अतिरिक्त डोंगल या डिवाइस तो नहीं लगा है। इसे मैकेनिक से अच्छे से जांच करवाएं।
3. वायरिंग और फ्यूज बॉक्स
शातिर चोर जीपीएस को कार की बैटरी से डायरेक्ट कनेक्ट कर देते हैं ताकि उसे चार्जिंग की जरूरत न पड़े। इससे बचने के लिए ये आश्वस्त करें कि डैशबोर्ड के नीचे के फ्यूज बॉक्स में कोई अतिरिक्त या संदिग्ध तार तो नहीं जुड़ी है? अगर कोई तार किसी अज्ञात ब्लैक बॉक्स से जुड़ी है तो उसे तुरंत हटवाएं।
4. फिजिकल इंस्पेक्शन
ट्रैकर्स चुम्बकीय (मैग्नेटिक) भी होते हैं जिन्हें कहीं भी चिपकाया जा सकता है, इसीलिए इन जगहों को हाथ डालकर चेक करना जरूरी है।
- बंपर के अंदरूनी हिस्से (आगे और पीछे)
- सीटों के नीचे (रेल्स के पास)
- बूट स्पेस (डिग्गी) में स्पेयर व्हील के नीचे
- व्हील वेल (टायर के ऊपर का खाली स्थान)
5. आरसी ट्रांसफर में देरी न करें
यह गिरोह बैंक से जब्त गाड़ियां खरीदता था। हमेशा सुनिश्चित करें कि आप जिससे गाड़ी ले रहे हैं, गाड़ी के कागज उसी के नाम पर हों। 'ओपन ट्रांसफर लेटर' पर गाड़ी लेने से बचें। जैसे ही गाड़ी लें, आरटीओ में ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू करें।