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दुपहिया राइडिंग ज्ञान के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे किया
Auto Desk, Amar Ujala, New Delhi
Updated Fri, 27 Jan 2017 12:25 AM IST
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हौंडा के एक सर्वे में हुअा खुलासा।
चाँद पर पहुंचती महिलाएं, सफलता की सीढियां चढ़ती महिलाएं, दुनिया के हर फील्ड में नाम रोशन करती महिलाएं, और अब दुपहिया चलने वाली काबिल महिलाएं। ऐसा हम नहीं बोल रहे हैं बल्कि भारत के लगभग 250 शहरों में हुआ एक सर्वे बता रहा है। अगर आप एक महिला हैं और खुद को काबिल नहीं समझती थीं तो स्कूटर का राइड शुरू कर दीजिये फिर आपको कुछ बोलने की ज़रुरत नहीं पड़ेगी लोग आपको दूर से ही पहचान लेंगे और कहेंगे देखो एक काबिल महिला जा रही है। इसका खुलासा हाल में दुपहिया कंपनी हौंडा ने तब किया जब महिला और पुरुषों को लेकर एक सर्वे कंपनी ने 24 हज़ार लोगों पर किया।
रोड साइन आईक्यू सर्वे में दुपहिया वाहन चालकों से रोड सेफ्टी चिह्नों पर लोगों की समझ को पुछा। 10 प्रमुख शहरों के तकरीबन 1,500 दोपहिया वाहन चालकों ने इसमें हिस्सा लिया। इसमें ज्यादातर लोग फेल हो गए। रोड सेफ्टी के तहत किये गए इस सर्वे में करीब 80 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालकों को अनिवार्य व चेतावनी वाले सुरक्षा चिह्नों का सही-सही ज्ञान ही नहीं है जो की एक चिंता का विषय है।
दुपहिया चालकों के संख्या की बात करें तो इसमें सबसे ज्यादा संख्या पुरुषों की है। सर्वे में 26% महिलाएं ठीक ढंग से सड़क चिह्नों की पहचान कर पाईं, वहीं पुरुषों का आंकड़ा सही सड़क सुरक्षा चिह्नों की पहचान करने को लेकर 21% ही रहा। सर्वे के परिणामों को देखते हुए पता चला कि भारत दोपहिया वाहनों का बड़ा बाजार तो है, लेकिन यहां सड़क सुरक्षा चिह्नों को लेकर लोगों की साक्षरता बेहद कम है। सर्वे के मुताबिक, 78% भारतीय 50% सड़क सुरक्षा चिह्न नहीं पहचान सके।
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दुपहिया चलने के मामले में सबसे ज्यादा जागरुक शहरों में मुंबई 79% के साथ टॉप पर रहा। मुंबई के बाद इस सूची में पुणे (63%) रहा। इसके बाद बेंगलुरु (41%) ने लिस्ट में अपनी जगह बनाई। सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि हमें रोड सेफ्टी के 3Es (एनफोर्समेंट, इंजिनियरिंग और एडुकेशन) समझने की जरूरत है।
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रोड साइन आईक्यू सर्वे में दुपहिया वाहन चालकों से रोड सेफ्टी चिह्नों पर लोगों की समझ को पुछा। 10 प्रमुख शहरों के तकरीबन 1,500 दोपहिया वाहन चालकों ने इसमें हिस्सा लिया। इसमें ज्यादातर लोग फेल हो गए। रोड सेफ्टी के तहत किये गए इस सर्वे में करीब 80 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालकों को अनिवार्य व चेतावनी वाले सुरक्षा चिह्नों का सही-सही ज्ञान ही नहीं है जो की एक चिंता का विषय है।
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दुपहिया चालकों के संख्या की बात करें तो इसमें सबसे ज्यादा संख्या पुरुषों की है। सर्वे में 26% महिलाएं ठीक ढंग से सड़क चिह्नों की पहचान कर पाईं, वहीं पुरुषों का आंकड़ा सही सड़क सुरक्षा चिह्नों की पहचान करने को लेकर 21% ही रहा। सर्वे के परिणामों को देखते हुए पता चला कि भारत दोपहिया वाहनों का बड़ा बाजार तो है, लेकिन यहां सड़क सुरक्षा चिह्नों को लेकर लोगों की साक्षरता बेहद कम है। सर्वे के मुताबिक, 78% भारतीय 50% सड़क सुरक्षा चिह्न नहीं पहचान सके।
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दुपहिया चलने के मामले में सबसे ज्यादा जागरुक शहरों में मुंबई 79% के साथ टॉप पर रहा। मुंबई के बाद इस सूची में पुणे (63%) रहा। इसके बाद बेंगलुरु (41%) ने लिस्ट में अपनी जगह बनाई। सर्वे के नतीजों से पता चलता है कि हमें रोड सेफ्टी के 3Es (एनफोर्समेंट, इंजिनियरिंग और एडुकेशन) समझने की जरूरत है।