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Low-Speed e-Bikes: बंगलूरू में लो-स्पीड ई-बाइक्स पर सख्ती की तैयारी, जानें क्या बदलने वाला है?

Mon, 30 Mar 2026 08:00 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 30 Mar 2026 08:00 PM IST
सार

बंगलूरू पुलिस ने डिलीवरी करने वालों द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले कम गति वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को 'मोटर वाहन अधिनियम' के दायरे में लाने की योजना बनाई है। ताकि बढ़ते 'यातायात उल्लंघनों' पर रोक लगाई जा सके और सड़क सुरक्षा में सुधार हो सके।

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Bengaluru Police to Regulate Low-Speed E-Bikes Under Motor Vehicles Act Amid Rising Traffic Violations
क्विक कॉमर्स डिलीवरी (सांकेतिक) - फोटो : AI

विस्तार

बंगलूरू पुलिस अब लो-स्पीड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को मोटर व्हीकल्स एक्ट के दायरे में लाने की तैयारी कर रही है। इन ई-बाइक्स का इस्तेमाल खासतौर पर डिलीवरी एजेंट्स द्वारा किया जाता है। और इनके कारण बढ़ते ट्रैफिक उल्लंघनों को रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।

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अभी तक ये वाहन नियमों से बाहर क्यों हैं?
लो-स्पीड ई-बाइक्स:

  • 25 किमी प्रति घंटा तक की स्पीड

  • 250W से कम मोटर पावर

के कारण मौजूदा नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन और ड्राइविंग लाइसेंस से छूट पाती हैं।
इन पर नंबर प्लेट भी नहीं होती, जिससे निगरानी और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

पुलिस को क्या दिक्कत आ रही है?
पुलिस के अनुसार, इन वाहनों से जुड़े कई नियम उल्लंघन सामने आ रहे हैं:

  • गलत दिशा में चलाना

  • फुटपाथ पर चलाना

  • गलत तरीके से पार्किंग

इन कारणों से सड़क सुरक्षा पर खतरा बढ़ रहा है।

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डिलीवरी सिस्टम पर क्यों उठे सवाल?
तेज डिलीवरी के दबाव में काम करने वाले डिलीवरी एजेंट्स अक्सर जोखिम भरे तरीके से गाड़ी चलाते हैं।
कम समय में ऑर्डर पहुंचाने की होड़ में:

  • ट्रैफिक नियमों की अनदेखी

  • तेज और लापरवाह ड्राइविंग

जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।

पुलिस ने इस मुद्दे पर कंपनियों और डिलीवरी वर्कर्स के साथ कई बैठकें भी की हैं।


क्या कंपनियों पर भी होगी सख्ती?
पुलिस का कहना है कि डिलीवरी टाइमलाइन को लोगों की सुरक्षा से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
इसलिए अब कंपनियों के लिए भी सख्त नियम लागू करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि जिम्मेदारी तय हो सके।

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स्कूल वाहनों के लिए क्या नया प्लान है?
बंगलूरू पुलिस स्कूलों के बाहर लगने वाले ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए नई नीति बना रही है।

इसमें:

  • स्कूल बस और वैन को कैंपस के अंदर पार्क करना

  • भीड़भाड़ वाले इलाकों में सड़क पर पार्किंग रोकना

जैसे उपाय शामिल हैं।

हालांकि, सभी स्कूलों में जगह की कमी इस योजना को लागू करने में चुनौती बन सकती है।


पैदल यात्रियों की सुरक्षा क्यों चिंता का विषय है?
शहर में पैदल यात्रियों की दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • सड़कों को पैदल यात्रियों के अनुकूल बनाना जरूरी है

  • वाहनों और पैदल लोगों के बीच टकराव कम करना होगा

इसके लिए कई हाई-रिस्क जंक्शनों को री-डिजाइन किया जा रहा है।

नाबालिग ड्राइविंग पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पुलिस ने नाबालिग ड्राइविंग को लेकर भी सख्ती बढ़ाई है।

  • AI आधारित कैमरों से निगरानी

  • नियम उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई

इसके साथ ही अभिभावकों से भी जिम्मेदारी निभाने की अपील की गई है।

क्या शहर में वॉकिंग और साइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा?
शहर में बेहतर फुटपाथ और साइक्लिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।
इसका उद्देश्य है:

  • ट्रैफिक कम करना

  • सुरक्षित और बेहतर शहरी जीवन बनाना


सुरक्षा को बेहतर बनाने का प्रयास
बंगलूरू में सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर बदलाव की तैयारी चल रही है।
लो-स्पीड ई-बाइक्स को नियमों में लाना, डिलीवरी सिस्टम पर नियंत्रण और पैदल यात्रियों की सुरक्षा। ये सभी कदम शहर को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाए जा रहे हैं। 

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