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नए मोटर वाहन एक्ट में निर्धारित जुर्माने से कम राज्य सरकार नहीं वसूल सकते: एटॉर्नी जनरल
Fri, 06 Dec 2019 10:45 AM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 06 Dec 2019 10:45 AM IST
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दिल्ली ट्रैफिक पुलिस
नए मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) के तहत यातायात नियम के उल्लंघन पर अधिसूचित किए गए न्यूनतम जुर्माने को राज्य सरकारें कम नहीं कर सकती हैं। भारत सरकार के मुख्य कानूनी सलाहकार अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने यह बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र के पास यह अधिकार है कि वह संसद द्वारा पारित कानून को लागू करने के लिए राज्यों को निर्देश जारी कर सकता है।
एक सितंबर को नया मोटर वाहन एक्ट लागू होने के बाद गुजरात सहित कुछ राज्यों में अधिनियम में दिए गए यातायात नियम उल्लंघन पर न्यूनतम जुर्माना कम कर दिया था। इस बाबत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल से कानूनी सलाह मांगी थी।
भारी जुर्माने को लेकर मचे बवाल के बीच कई राज्य सरकारों ने नए मोटर वाहन एक्ट को लागू करने से टाल दिया है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने तो 18 कंपाउंडेबल अपराधों के लिए जुर्माने में कमी का एलान कर दिया था।
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जिसके बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने केंद्रीय कानून के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार की शक्तियों पर अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल से कानूनी सलाह मांगी थी। साथ ही राज्य सरकारों के जुर्माना घटाने के मसले पर भी राय मांगी।
24 कंपाउंडेबल अपराध हैं। जैसे कि बिना हेलमेट या सीटबेल्ट पहने गाड़ी चलाना, बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी चलाना, आपातकालीन वाहनों का रास्ता रोकना। इस तरह के अपराधों में कोई अपराधी मौके पर ही जुर्माना अदा कर सकता है और उसे अदालत जाने की जरूरत नहीं है। खबर के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि वेणुगोपाल ने कहा कि चूंकि संशोधित मोटर वाहन एक्ट एक संसदीय कानून है, इसलिए राज्यों में राष्ट्रपति की सहमति के बिना केंद्रीय कानून के वैधानिक प्रावधान के तहत जुर्माना तय करने के लिए कोई कानून पारित नहीं किया जा सकता है।
'केंद्र के निर्देशों की अवहेलना से हो सकती है कार्रवाई'
कानून की धारा 200 में राज्यों को जुर्माना तय करने की शक्ति दी गई है, जिसमें केंद्रीय कानून ने न्यूनतम और अधिकतम जुर्माना निर्धारित किया है।
सूत्रों ने कहा कि क्या राज्य केंद्रीय कानून के कार्यान्वयन को दरकिनार कर सकते हैं, इस बारे में अटॉर्नी जनरल कहा कि संविधान के अनुच्छेद 256 के तहत, केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश जारी कर सकती है कि वे मानदंडों का पालन करें।
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एक सितंबर को नया मोटर वाहन एक्ट लागू होने के बाद गुजरात सहित कुछ राज्यों में अधिनियम में दिए गए यातायात नियम उल्लंघन पर न्यूनतम जुर्माना कम कर दिया था। इस बाबत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल से कानूनी सलाह मांगी थी।
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भारी जुर्माने को लेकर मचे बवाल के बीच कई राज्य सरकारों ने नए मोटर वाहन एक्ट को लागू करने से टाल दिया है। गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने तो 18 कंपाउंडेबल अपराधों के लिए जुर्माने में कमी का एलान कर दिया था।
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जिसके बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने केंद्रीय कानून के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार की शक्तियों पर अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल से कानूनी सलाह मांगी थी। साथ ही राज्य सरकारों के जुर्माना घटाने के मसले पर भी राय मांगी।
24 कंपाउंडेबल अपराध हैं। जैसे कि बिना हेलमेट या सीटबेल्ट पहने गाड़ी चलाना, बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ी चलाना, आपातकालीन वाहनों का रास्ता रोकना। इस तरह के अपराधों में कोई अपराधी मौके पर ही जुर्माना अदा कर सकता है और उसे अदालत जाने की जरूरत नहीं है। खबर के मुताबिक सूत्रों का कहना है कि वेणुगोपाल ने कहा कि चूंकि संशोधित मोटर वाहन एक्ट एक संसदीय कानून है, इसलिए राज्यों में राष्ट्रपति की सहमति के बिना केंद्रीय कानून के वैधानिक प्रावधान के तहत जुर्माना तय करने के लिए कोई कानून पारित नहीं किया जा सकता है।
'केंद्र के निर्देशों की अवहेलना से हो सकती है कार्रवाई'
कानून की धारा 200 में राज्यों को जुर्माना तय करने की शक्ति दी गई है, जिसमें केंद्रीय कानून ने न्यूनतम और अधिकतम जुर्माना निर्धारित किया है।
सूत्रों ने कहा कि क्या राज्य केंद्रीय कानून के कार्यान्वयन को दरकिनार कर सकते हैं, इस बारे में अटॉर्नी जनरल कहा कि संविधान के अनुच्छेद 256 के तहत, केंद्र सरकार राज्यों को निर्देश जारी कर सकती है कि वे मानदंडों का पालन करें।