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ऑटो सेक्टर के लिए बुरी खबर! SBI ने ऑटो डीलर्स के लिए लोन की शर्तों को बनाया सख्त

Tue, 30 Jul 2019 04:34 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Tue, 30 Jul 2019 04:34 PM IST
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state bank of india tightens the lending terms for car and bike dealers
SBI Car Loan - फोटो : Youtube

मंदी से जूझ रही आटो इंडस्ट्री के लिए एक और बुरी खबर है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने ऑटो डीलरों को लोन देने की शर्तों को सख्त कर दिया है। बैंक ये कदम ऑटो सेक्टर में आ रही मंदी को देखते हुए उठाया है। वहीं साल 2018 के मध्य में सामने आया बैंकिंग संकट भी इस साल और गहरा गया है। 

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18 साल के सबसे निचले स्तर पर बिक्री

न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों में लिक्विडिटी की कमी, बीमा की बढ़ती कीमतें और लगातार बढ़ती टैक्स की दरों ने कार सेक्टर पर दबाव बढ़ा है, जिसके चलते अप्रैल से मासिक बिक्री गिर कर 17 से 20 फीसदी तक पहुंच गई है। वहीं जून में यात्री वाहनों की बिक्री गिर कर 18 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।
 

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जारी किया मेमो

ह्यूंदै मोटर इंडिया की कारें बेच रहे डीलर्स को भेजे गए इंटरनल मेमो में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि कार निर्माता कंपनियों के पॉर्टफोलियो में ‘बढ़ते तनाव’ के चलते बैंक अपनी लोन देने की शर्तों में संशोधन कर रहा है। वहीं ऐसा ही मेमो दूसरे ब्रांडस के डीलर्स को भी जारी किए गए हैं। संशोधित शर्तों में कहा गया है कि जब तक ह्यूंदै मोटर डीलर लोन की 25 फीसदी धनराशि के बराबर कुछ गिरवी नहीं रखेंगे, तब तक बैंक उन्हें लोन नहीं देगा। साथ ही अगर कोई डीलर एसबीआई के अलावा अन्य दो बैंकों से भी लोन लेता है, तो उन्हें लोन की रकम का कम से कम 50 फीसदी गिरवी रखना होगा। साथ ही, बैंक ने डीलर्स के लिए उधार देने का समय भी 90 दिनों से घटाकर 60 दिन कर दिया है।
 

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देनी होगी 25 से 50 फीसदी सिक्योरिटी

27 मार्च को भेजे गए मेमो की संशोधन की शर्तों के मुताबिक जिन ह्यूंदै डीलर्स को पहले ही लोन मिल चुका है उन्हें भी लोन की रकम का 25 से 50 फीसदी सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराना होगा। इस मेमो पर बैंक के सप्लाई चैन फाइनेंसिंग के चीफ जनरल मैनेजर के दस्तखत हैं। ह्यूंदै 31 मार्च तक 33 लाख वाहन बेच चुकी है और देश के 16 फीसदी बाजार पर इसकी हिस्सेदारी है।
 

मंदी से घबरा रहे हैं बैंक

खबरों के मुताबिक ऑटो सेक्टर में चल रही मंदी के चलते बैंक लगातार अपने रिस्क एक्सपोजर की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं मार्च के आखिर तक ऑटो रिटेल बाजार में स्टेट बैंक का लोन रिस्क 718.8 अरब रुपये था। वहीं एसबीआई के बाद बाकी बैंक भी लोन को लेकर सतर्क हो गए हैं। कोटक महिंद्रा बैंक के जॉइन्ट मैनेजर ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि कुछ डीलर्स एक बैंक की क्रेडिट लाइन का इस्तेमाल कर दूसरे बैंक का कर्ज उतार रहे हैं, वहीं बैंक इस तरह की मामलों पर कड़ा रुख अपना रहा है।
 

ऐसे चलती है गाड़ियों की डीलरशिप

जब एक कंपनी किसी को डीलर बनाती है तो फिर उसको कम से कम हर महीने 300 गाड़ियों की बिक्री करने का टारगेट दिया जाता है। वहीं वो 500 गाड़ियों का स्टॉक रख सकता है। डीलर को जो गाड़ियां मिलती हैं, उसके लिए उसे एडवांस में पेमेंट करना होता है। डीलरों को गाड़ियां कंपनी से लेने के लिए बैंक या फिर एनबीएफसी कंपनियों से फाइनेंस मिलता है। यह फाइनेंस छह महीनों के लिए होता है। डीलर गाड़ियों की बिक्री के आधार पर पैसा वापस करते हैं। जब तक बिक्री चलती रहती है, तब तक फाइनेंस कराने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होती है।
 

एनबीएफसी कंपनियों ने डीलरों को अब फाइनेंस करना बंद

गौरतलब है कि बिक्री न होने के चलते बैंकों व एनबीएफसी कंपनियों ने डीलरों को अब फाइनेंस करना बंद कर दिया है। बड़े शहरों में फिलहाल शोरूम बंद होना शुरू हो गए हैं। थोड़े दिनों में इसका असर छोटे शहरों व कस्बों में भी दिखने लगेगा। बैंकों का कहना है कि अगर गाड़ियों की बिक्री में इजाफा होता है तो फिर से फाइनेंस की सुविधा को शुरू किया जा सकता है। 
 

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