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क्या हवा की सेहत बिगाड़ने के लिए गाड़ियां हैं जिम्मेदार, 'नाम' के लिए ही हो रही है प्रदूषण जांच!

Tue, 03 Dec 2019 10:18 AM IST
Abhishek Singh ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhishek Singh Updated Tue, 03 Dec 2019 10:18 AM IST
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PUC check machine not available in most of Delhi places to measure PM scale
पीयूसी जांच केंद्र (फाइल फोटो) - फोटो : Amar Ujala

डीजल कारें नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) और PM 2.5 का उत्सर्जन करती हैं। इसके जांच के लिए देशभर में प्रदूषण केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन इसकी जांच दिल्ली-एनसीआर के किसी भी केंद्र पर नहीं होती है। मौजूदा आंकड़ों की मानें, तो वर्तमान समय में प्रदूषण नहीं फैलाने वाले वाहनों को प्रमाण पत्र देने के लिए पुरानी मशीन का ही इस्तेमाल किया जा रहा है।  

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जांच में नहीं दी गई 2.5 उत्सर्जन की जानकारी

आंकड़ों के अनुसार सितंबर और नवंबर 2019 तक आठ लाख (प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट) पीयूसी का वितरण दिल्ली के 943 केंद्र पर किया गया है। साथ ही, किसी में भी नाइट्रोजन ऑक्साइड और पीएम 2.5 उत्सर्जन की जानकारी नहीं दी गई है।  

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विभिन्न देशों में होती है पीएम 2.5 की जांच

जानकारों के अनुसार, यूरोप, अमेरिका के अलावा भी ऐसे कई देश हैं जहां प्रदूषण जांच केंद्र पर नाइट्रोजन ऑक्साइड, पीएम 2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषण के कारकों की जांच की जाती है। वहीं, भारत में कम ही जगह है, जहां इनके जांच के लिए मशीनें उपलब्ध हैं।   

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दिल्ली में दो जगहों पर पीयूसी केंद्र

बता दें कि दिल्ली में मात्र दो पीयूसी केंद्र हैं, जहां पर कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन के उत्सर्जन की जांच संभव है। वहां भी केवल पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों की ही जांच हो पाती है।   

क्या होता है पीयूसी? 

PUC का फुल फॉर्म है पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल। इसकी जांच को कहते हैं पीयूसी टेस्ट। इस जांच के बाद ही किसी गाड़ी को पीयूसी सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह सर्टिफिकेट एक निश्चित समय के लिए मान्य होता है। BS4 गाड़ियों के लिए यह समय सीमा एक साल की होती है। जबकि अन्य गाड़ियों के लिए एक बार किया गया प्रदूषण जांच और पीयूसी सर्टिफिकेट तीन महीने तक ही मान्य होता है। 

दस हजार का लग सकता है जुर्माना

अगर आपकी गाड़ी के पीयूसी सर्टिफिकेट की समय सीमा खत्म हो चुकी है, तो पकड़े जाने पर आपको इसके लिए 10 हजार रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। नया कानून लागू होने से पहले जुर्माने की राशि पहली बार की गलती के लिए एक हजार और इसके बाद के लिए दो हजार रुपये थी।  

पीयूसी जांच में लगते हैं 60 से 100 रुपये 

वाहनों के प्रदूषण की जांच करवाकर नया सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए आपको सिर्फ 60 से 100 रुपये तक ही देने होंगे। भारत में गाड़ियों के प्रदूषण की जांच की प्रक्रिया सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैनुफैक्चरर्स (सियाम) की तरफ से विकसित की गई है। 

ऐसे होता है जांच 

प्रदूषण की जांच के लिए एक गैस एनालाइजर को एक ऐसे कंप्यूटर से जोड़ा जाता है, जिसमें कैमरा और प्रिंटर भी जुड़ा हो। यह गैस एनालाइजर गाड़ी से निकलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की जांच करता है और इसे कंप्यूटर को भेजता है। जबकि कैमरा गाड़ी के लाइसेंस प्लेट की फोटो लेता है। अगर गाड़ी से निश्चित दायरे के अंदर प्रदूषण निकल रहा हो, तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है।  

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