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नई कार-बाइक का रजिस्ट्रेशन महंगा करने जा रही है सरकार, 10 गुना तक होगी बढ़ोतरी!

Wed, 12 Jun 2019 03:07 PM IST
Harendra Chaudhary ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 12 Jun 2019 03:07 PM IST
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niti aayog proposed to promote electric vehicle, increase car-two wheelers registration cost
जाम में फंसी गाड़ियां - फोटो : अमर उजाला

अगर आप कार या बाइक खरीदने की सोच रहे हैं, तो देरी न करें, क्योंकि हो सकता है कि आपकी पसंदीदा कार महंगी हो जाए। कार कंपनियां तो गाड़ियों की कीमत में बढ़ोतरी करने नहीं जा रही हैं, लेकिन संभव है कि सरकार की नीतियां उसे महंगा बना दें। सरकार जल्द ही गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन चार्ज में बढ़ोतरी करने पर विचार कर रही है।

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10 गुना तक की बढ़ोतरी

न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन चार्जेज में 10 गुना तक की बढ़ोतरी करने की योजना पर विचार कर रही है। सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने सरकार से सिफारिश की है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन चार्ज में बढ़ोतरी की जाए।
 

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इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव

नीति आयोग ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए कई प्रस्ताव सरकार को सौंपे हैं, लेकिन इसमें सबसे अहम सिफारिश गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में बढ़ोतरी है। वहीं सरकार ने भी नीति आयोग की कुछ सिफारिश को गंभीरता से लेते हुए उन पर काम करना शुरू कर दिया है।      
 

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कार का रजिस्ट्रेशन 600 रुपये से 6000 रुपये

नीति आयोग ने जो सिफारिशें सरकार को सौंपी हैं, उनके मुताबिक टू-व्हीलर की रजिस्ट्रेशन फीस 60 रुपये से बढ़ा कर 600 रुपये करने का प्रस्ताव है। वहीं कारों की रजिस्ट्रेशन फीस को 10 गुना ज्यादा 600 रुपये से बढ़ा कर 6000 रुपये कर दिया जाए। आयोग का तर्क है कि अगर सरकार को इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है तो उन्हें बिक्री बढ़ाने के लिए इंसेटिव और प्रमोशंस पर भी ध्यान देना होगा।
 

पेट्रोल और डीजल चलित वाहनों पर अतिरिक्त सेस

इससे पहले पिछले साल दिसंबर में नीति आयोग ने सरकार से सिफारिश की थी कि फेम-2 योजना को प्रोत्साहित करना के लिए पेट्रोल और डीजल चलित वाहनों पर अतिरिक्त सेस लगाया जाए। सरकार ने कहा था कि कारों पर दो हजार से ढाई हजार रुपए और दो पहिया वाहनों पर 300 रुपये का अतिरिक्त सेस लगाया जाए।
 

ऑटो इंडस्ट्री कर रही विरोध

वहीं नीति आयोग की कई सिफारिशों का विरोध भी शुरू हो गया है। खुद ऑटो इंडस्ट्री इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित किए जाने के तरीकों से नाराज है। ऑटो सेक्टर का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर सरकार जल्दबाजी कर रही है। असल में सरकार साल 2023 तक पेट्रोल और डीजल से चलने वाले तिपहिया वाहनों और साल 2025 तक 150सीसी से नीचे के दोपहिया वाहनों पर बैन लगाने की योजना बना रही है। इंडस्ट्री का कहना है कि सरकार के इस तुरंत वाले फैसले से कंपोनेंट या यानी कलपुर्जे और पार्ट्स बनाने वाले प्रभावित होंगे, जो इस सेक्टर की रीढ़ हैं।
 

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