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लोकसभा में पास हुआ मोटर व्हीकल संशोधन बिल, विपक्ष ने राज्यों के अधिकार छीनने का किया था विरोध
Tue, 23 Jul 2019 05:14 PM IST
Harendra Chaudhary
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
ऑटो डेस्क, अमर उजाला
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Tue, 23 Jul 2019 05:14 PM IST
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कार का चालान करते ट्रैफिक पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2019 मंगलवार को लोकसभा में पास हो गया। अब इस बिल को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। बजट सत्र पर चर्चा के दौरान पिछली 15 जुलाई को केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोकसभा में इस बिल को पेश किया था।
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लोकसभा में चर्चा के दौरान संसद सदस्यों ने राज्यों के अधिकारों को लेकर आपत्ति जताई थी। इससे पहले पिछली 16वीं लोकसभा में इस बिल को पास किया गया था, लेकिन लोकसभा भंग होने के बाद नई सरकार ने इसे कुछ अन्य संशोधनों के साथ पुराने स्वरूप में ही 17वीं लोकसभा में पेश करने का फैसला किया।
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मोटर व्हीकल संशोधन बिल 2019 पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए विपक्षी दलों ने सरकार ने आग्रह किया है कि राज्यों के परिवहन सेवाओं से जुड़े अधिकारों में केंद्र सरकार की कोई दखलंदाजी न हो। लोकसभा में ‘मोटर व्हीकल (संशोधन) विधेयक- 2019 पर सोमवार को शुरू हुई चर्चा को आगे बढ़ाते हुए द्रमुक की कनिमोझी ने कहा कि पहले विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजा गया, लेकिन समिति की अनुशंसा को इसमें शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राज्यों के अधिकार क्षेत्र में कोई दखल नहीं हो।
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वहीं तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि वह दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जुर्माना बढ़ाने के प्रावधानों का समर्थन करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि वह राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देना चाहती है। उन्होंने कहा कि राज्यों को विश्वास में लिए बिना कोई कानून बनाया जाएगा तो इसका प्रभावी क्रियान्वयन कैसे होगा क्योंकि प्रवर्तन एजेंसियां तो राज्यों की होती हैं।
शिवसेना के प्रतापराव जाधव ने भी विपक्षी दलों की इस बात का समर्थन किया कि राज्यों के अधिकार सुरक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कि राजमार्गों पर हर 50 किलोमीटर पर एक ट्रामा सेंटर बनना चाहिए। जदयू के कौशलेंद्र कुमार ने भी यह कहा कि संशोधन विधेयक में यह ध्यान रखा जाए कि राज्यों के अधिकार क्षेत्र में कोई दखल नहीं हो।
वहीं बीजू जनता दल की चंद्राणी मुर्मू ने कहा कि सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। जबकि बसपा के दानिश अली ने कहा कि सरकार को सुरक्षा से जुड़े और प्रावधान लाने चाहिए तथा दिल्ली एवं आसपास के इलाको में गैरकानूनी परिवहन पर रोक लगानी चाहिए।