रॉयल एनफील्ड ने पिछले 100 साल में बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं। जिसमें एक रोचक तथ्य यह भी है कि दुनिया की पहली बुलेट जिस देश ने बनाई वहीं इसका उत्पादन बंद कर दिया गया है। सबसे पहली बुलेट ब्रिटिश फौज के लिए तैयार हुई । जिसके बाद इन बाइक्स को ब्रिटिश फौज के अलावा रशियन सरकार ने भी खरीदा। वहीं देश की आजादी के बाद भारत को इंडो-पाक बॉर्डर की चौकसी बढ़ानी पड़ी।
100 साल पुरानी रॉयल एनफील्ड का ब्रिटेन से भारत तक का रोचक इतिहास
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म्रदास (चेन्नई) में पहली बार बनी एनफील्ड
मद्रास मोटर्स ने बुलेट असेंबल करने की ट्रेनिंग के लिए अपने कुछ टेक्नोक्रैट्स को इंग्लैंड भेजा। जिसके बाद वहां से प्राप्त नॉक डाउन यूनिट्स भारत में असेंबल होनी शुरू हुई। और पुलिस को बुलेट मिलते ही लोगों में इसका क्रेज सर चढ़ कर बोलने लगा। बुलेट के प्रति लोगों के क्रेज को देखकर रॉयल एनफील्ड यूके ने भारत में एनफील्ड इंडिया लि. नाम से एक सहायक कंपनी बनाई और मद्रास (जो कि अब चेन्नई के नाम से जाना जाता है) में फैक्टरी स्थापित कर ली।
जब यूके का कारखाना हुआ दिवालिया
1957 में एनफील्ड इंडिया भारत में ही बुलेट के कम्पोनेंट्स बनाने लगी। जिस समय यह सब हो रहा था उस समय देश में राजदूत जावा खूब बिकती थी। इसके बावजूद बुलेट का क्रेज साथ साथ चला। कुछ समय बाद यूके कारखाने के दिवालिया होने के बाद भारत में 'बुलेट' का उत्पादन जारी रखा गया और 1999 में एनफील्ड इंडिया ने अपनी ब्रांडिंग को 'रॉयल एनफील्ड' में बदल दिया। 1990 में ईशर ने एनफील्ड इंडिया में 26% हिस्सेदारी खरीदी थी। एनफील्ड नाम के पुराने ब्रिटिश ब्रांड को दूसरा जन्म देने का श्रेय सिद्धार्थ लाल को जाता है जो ट्रेक्टर बनाने वाली ईशर कंपनी के मालिक हैं।
क्लासिक का जन्म
भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक क्लासिक का जन्म नवम्बर 2009 हुआ। जो आज भी दुनिया में मशहूर है। रॉयल एनफील्ड में कभी नंबर वन बनने की होड नहीं रही। कंपनी ने हमेशा मांग के हिसाब से उत्पादन को बनाए रखा। जिस कारण आज भी रॉयल एनफील्ड की बुलेट की वेटिंग बनी रहती है। इस समय यूरोप, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में भी रॉयल एनफील्ड का निर्यात किया जाता है। एनफील्ड आज सालाना करीब 450,000 मोटरसाइकिल दुनिया भर में बेचती है।
कैसे मिला रॉयल एनफील्ड का ट्रेडमार्क
'रॉयल एनफील्ड' के नाम के पीछे होल्डर परिवार की अहम भुमिका रही। होल्डर ने यह अधिकारिक नाम 1967 में दिवालिया कंपनी की बिक्री के दौरान खरीदा था। होल्डर परिवार 1967 से लेकर आज तक रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिलों के स्पेयर का उत्पादन कर रहा है। डेविड होल्डर ने भारत के एनफील्ड द्वारा 'रॉयल एनफील्ड' नाम के उपयोग पर विरोध भी किया। हालांकि ब्रिटेन की एक अदालत ने भारतीय कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया और इसलिए यह ट्रेडमार्क भारतीय कंपनी को मिला।