ऑटो सेक्टर को 'आत्मनिर्भर' बनाने के लिए भारतीय कंपनियों ने कसी कमर, ड्रैगन की होगी छुट्टी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर मुहिम में अब भारतीय ऑटो सेक्टर और कंपनियां भी शामिल हो गई हैं। यही कारण है कि चीन में बने सामान पर निर्भरता खत्म करने के लिए वाहन कंपनियां ऑटो पार्ट्स बनाने वाली भारतीय कंपनियों को तकनीक और कौशल से मदद करेंगी। रिपोर्ट्स की मानें तो मारुति, महिंद्रा, टाटा, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों ने अपने वाहनों में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स को चीन से आयात करने के बजाए देश में तैयार करने का फैसला किया है। इसके लिए ये बड़ी कंपनियां छोटी कंपनियों को मदद करेंगी।
ड्रैगन पर कितना निर्भर है भारतीय ऑटो सेक्टर?
- साल 2018-19 में चीन से 4.75 अरब डॉलर के ऑटो पार्ट का आयात किया गया।
- वाहनों को बनाने के लिए 60 फीसदी रॉ-मैटेरियल का आयात चीन से होता है।
- भारतीय ऑटो सेक्टर में चीनी ऑटो पार्ट्स की 27 फीसदी हिस्सेदारी है।
- रिपोर्ट्स की मानें तो करीब 300 चीनी कंपनियां भारत में कारोबार के लिए आना चाहती हैं।
आपदा को बनाया अवसर
कोरोना से भले ही भारतीय ऑटो सेक्टर को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, लेकिन इस महामारी की वजह से अब सालों पुराना तरीका बदलने जा रहा है। दरअसल कोरोना के कारण सप्लाई चैन रुक गया था, जिसके कारण भारतीय ऑटो सेक्टर को कलपुर्जों की कमी से जूझना पड़ा। यही कारण है कि दोबारा ऐसी नौबत न आए इसके लिए कंपनियां दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता को कम कर रही हैं।
ऑटो इंडस्ट्री की निर्भरता को इस तरह से समझा जा सकता है कि वित्तवर्ष 2018-19 में भारत ने वाहनों को बनाने के लिए 17.6 अरब डॉलर के कलपुर्जो का आयात किया था, जिसमें से 25 फीसदी आयात चीन से किया गया था।
बढ़ेगा खर्च, लेकिन कंपनियां तैयार
अगर भारतीय कंपनियां चीन से कलपुर्जों का आयात करने के बजाए भारत में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों से सामान लेती हैं, तो इससे पुर्जों की लागत बढ़ जाएगी। लेकिन, कंपनियां इसके लिए तैयार हैं।