और इस तरह से भारत आ गई एक अमेरिकी मोटरसाइकिल कंपनी
दुनिया की हर ऑटो निर्माता कंपनी के लिए कारोबार के लिहाज से भारत एक महत्ववपूर्ण देश है। पिछले साल ऑटो एक्सपो 2016 में यूएम ने अपनी दो मोटरसाइकिलों कमांडो व स्पोर्ट के जरिए भारत में दस्तक दी और छा गई। दुनिया के 40 से भी ज्यादा देशों में अपना कारोबार करने वाली इस मोटरसाइकिल कंपनी की भारत में रणनीति को लेकर इसके आने की पूरी कहानी हमसे एक एक्सक्लूसिव साक्षात्कार में कंपनी के डायरेक्टर राजीव मिश्रा ने साझा की।
कैसे आए इंडिया
जब तीन साल पहले हमने इस ब्रांड की भारत में परिकल्पना की तो हमारा सबसे बड़ा कंसर्न ये था कि हम यहां के कंपटीशन से कैसे निपटेंगे। इसके लिए हमने यहां का मार्केट सर्वे किया तो पता चला कि एक सेगमेंट ऐसा है जिसमें बहुत बड़ा वॉक्यूम है और वह सेगमेंट था क्रूजर। क्रूजर का मतलब लोग अमेरिका से जोड़कर देखते हैं। हम चाहते थे कि हम अमेरिकन ब्रांड को अफोर्डेबल कीमत के साथ यहां लॉन्च करें। यही वो जगह थी जहां पर हम अपनी मोटरसाइकिलों को उतारना चाहते थे। अमेरिकन क्रूजर अफोर्डेबल कीमत पर पेश करना हमारी प्राथमिकता थी और हमने ऐसा किया।
शुरुआत
ऑटो एक्सपो में 2016 फरवरी में हमने अपने दो मॉडल यहां पर लॉन्च किए। इसका रिस्पांस बहुत अच्छा था क्योंकि हम कई तरह से एकदम अलग थे। यहां पर सबसे खास बात यह थी कि हम यहां पर किसी के साथ कंपीट नहीं कर रहे थे। हमने देखा कि भारत में ज्यादातर जो मोटरसाइकिल कंपनियां हैं वो स्पोर्ट मोटरसाइकिलों पर ज्यादा जोर दे रही हैं। क्रूजर सेगमेंट केवल बड़े तपके के लोग अफोर्ड कर सकते हैं इस वजह से एक बड़ा वॉक्यूम था। हमारी इन मोटरसाइकिलों को लोगों ने काफी पसंद किया। फरवरी से लेकर जून तक ही हमें साढ़े तीन हजार मोटरसाइकिलों की बुकिंग मिली। हमारे पास आज के समय में पूरे देश में 50 डीलर हैं। सीपी में हमने अपना पहला शोरूम शुरू किया था। अब तक हमने 6 हजार 2 सौ मोटरसाइकिलें डिलीवर की हैं इसके बावजूद हमारे पास अभी भी साढ़े तीन हजार मोटरसाइकिलों की बुकिंग पेंडिंग हैं
हम सबसे अलग हैं
हमारा लुक और स्टाइल एकदम अलग है। जब हम कस्टमर से सर्वे कर रहे थे उस समय उनकी दो चाहत थी कि एक में उनको क्रूजर जैसा कंफर्ट चाहिए था दूसरे में स्पोर्ट बाइक जैसे फीचर की जरूरत जिसका रिस्पांस टाइम अच्छा हो। जब इसको देखकर हम आगे मोटरसाइकिल बनाने निकले तो हमने एक का नाम स्पोर्ट रखा व दूसरे का कमांडो। यह दोनों ही मोटरसाइकिलें 300 सीसी की कंपटीशन में हैं और इसमें सिर्फ रॉयल एनफील्ड ही हमारी कोर कंपटीटर थी। लेकिन कई मामले में हम उनसे आगे हैं। इसमें जितना कंपटीशन है हम उनमें सबसे अलग हैं हमारी मोटरसाइकिल सबसे शक्तिशाली है यह 24 एचपी की शक्ति देती है। हम यह सबकुछ बेहद अफोर्डेबल कीमत पर कर पाए। इस तरह से हम यहां मौजूद हर मोटरसाइकिल से अलग खड़े होने में सफल रहे।
आगे और क्या
जुलाई और अगस्त में हम अपनी दो और मोटरसाइकिलें लेकर आ रहे हैं जिनका नाम है क्लासिक और मोहाबे। इनमें भी आपको हमारा अंदाज और इरादा आपको नजर आएगा। ये दोनों ही मोटरसाइकिलें स्टाइल व पावर के मामले एकदम जुदा होंगी। ये हमारी मौजूदा कटेगरी को फॉलो करेंगी। इनकी कीमत लगगभग आसपास होगी पर ये ज्यादा महंगी होंगी यह तय है। कीमतों पर असर बीएस4 के लागू होने से भी हो रहा है।
बीएस 3 से इंडस्ट्री पर हुआ असर
हमारे पास महज 2 हजार गाड़ियां बीएस3 वाली बची हैं इन्हें हम आराम से अपग्रेड कर लेंगे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पूरी इंडस्ट्री प्रभावित हुई है। इतनी इंवेटरी इसलिए बच गई क्योंकि किसी ने अपना काम करना बंद नहीं किया था। मोटरसाइकिल के हर पुर्जे बाहर से वेंडर के जरिए लिए जाते हैं। वेंडर हर प्रोडक्ट को डिलीवर करने में वक्त लेता है। अगर कंपनियां अपना बिजनेस बंद करके बीएस4 पर शिफ्ट करती तो ज्यादा मुश्किल नहीं होती लेकिन ऐसा संभव नहीं है। पूरा का पूरा ईकोसिस्टम ऐसा बना हुआ है जिसे कोई अवाइड नहीं कर सकता। 280 मॉडलों को बीएस4 पर अपग्रेड होना था इस वजह से इतनी इंवेंटरी बची रह गई थी। बीएस3 वाहनों पर बैन का असर ऑटो निर्माता कंपनियों को काफी हुआ है।
किसके लिए है ये मोटरसाइकिलें
20 साल से 60 साल तक का कोई भी कस्टमर इसे चलाए तो उस पर यह फबती है। यह हर उम्र वर्ग के लिए है इसका सीटिंग पोश्चर काफी अच्छा है। हमारा सेगमेंट बहुत बड़ा है हम हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
कहां बनाते हैं
हम अपनी मोटरसाइकिलों का निर्माण काशी पुर में करते हैं और हमारी क्षमता 50 हजार मोटरसाइकिलों की सालाना है। पर मौजूदा डिमांड को देखते हुए हमें दूसरे प्लांट की जरूरत पड़ेगी और हम उस पर काम भी कर रहे हैं।
हर मोटरसाइकिल कंपनी ने अपने तरफ से कुछ न कुछ एफर्ट लगाए हैं और हम उन युवाओं को समझाने की कोशिश करते हैं जो कॉलेज से निकलने वाले हैं। हम कोशिश करते हैं कि हमारी मोटरसाइकिल खरीदने वाला साथ में या तो हेलमेट लेकर आए या फिर हमसे खरीदे। हम अपने ग्राहकों पर दबाव बनाते हैं कि वो हेलमेट हमसे ही खरीदें। लेकिन हम राइडर को सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभियान समय-समय पर चलाते हैं। बहुत सारे स्टेट गवर्नमेंट ने अब यह मेंडेटरी कर दिया है कि बाइक के साथ हेलमेट देना ही है। कंपनी उसके लिए कास्ट कहां से वसूलेगी यह उस पर निर्भर करता है। लोगों को जागरूक करना काफी जरूरी है। हमने हाल ही में मुंबई में लोगों को रोक-रोककर हेलमेट निशुल्क बांटे। बाहर देशों में लोग साइकिल चलाते वक्त हेलमेट लगाते हैं पर हमारे यहां बाइक चलाते वक्त भी हेलमेट नहीं लगाते।
2020 तक की क्या योजना है
हमारा मकसद है कि 2020 तक यूएम एक लवेवल ब्रांड बन जाए और लोग हमारी गुणवत्ता व विश्वसनीयता के लिए हमें जानें। हम इस सेगमेंट यानी कि क्रूजर सेगमेंट में बड़े प्लेयर की तरह स्थापित होना चाहते हैं। हम अपने सर्विस सपोर्ट को भी मजबूत करना चाहते हैं। हम पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान दे रहे हैं। इस साल के अंत तक 100 डीलर बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। अभी हमारे पास 33 शहरों में 50 डीलर हैं।
ऑटो उत्साहियों के लिए संदेश
मशीन और आदमी का कांबीनेशन बहुत खतरनाक हो सकता है। ऐसे में इसे चलाते वक्त थोड़ी सावधानी बरतें। राइडिंग गियर भी पहनें और हेलमेट पहने बगैर मोटरसाइकिल पर न बैठें।
मोटरस्पोर्ट में दस्कत देंगे
हम मोटरस्पोर्ट नहीं आएंगे लेकिन हां हम एडवेंचर स्पोर्ट में जरूर नजर आएंगे इस पर पूरी कोशिश कर रहे हैं।