8 सालों में पहली बार घटी कार-एसयूवी की बिक्री, पढ़ें क्या है इस गिरावट की वजह
ऑटोमोबाइल सेक्टर में पिछले 8 साल में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल 2019 में पैसेंजर वाहनों की बिक्री 17.07 प्रतिशत घट कर 2,47,541 यूनिट ही रह गई है। जबकि पिछले साल अप्रैल में 2,98,504 वाहनों की बिक्री हुई थी। वहीं एसयूवी सेगमेंट में भी 7 प्रतिशत की गिरावट हुई है। वहीं स्कूटर्स की बिक्री में 26 प्रतिशत और मोटरसाइकिल्स की बिक्री में 12 प्रतिशत की गिरावट हुई है।
साल 2011 में 20 प्रतिशत की गिरावट
सियाम की तरफ से जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक कार और एसयूवी की बिक्री में अक्टूबर 2011 के बाद 17 प्रतिशत की गिरावट हुई है। साल 2011 में 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं इस गिरावट के बाद मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा और टोयोटा की गाड़ियों की मांग में जबरदस्त कमी आई है।
तीन महीने से जारी है गिरावट
वहीं यात्री वाहनों की बिक्री में गिरावट का सिलसिला पिछले तीन महीने से जारी है। मार्च 2019 में यात्री वाहनों की बिक्री लगभग 3 प्रतिशत और कार की बिक्री 6.87 प्रतिशत गिरी थी। जबकि फऱवरी 2019 में यह यात्री वाहनों की बिक्री में 1 प्रतिशत और कारों की बिक्री में 4.33 प्रतिशत की गिलावट दर्ज की गई थी। इसके अलावा तिपहिया वाहनों की बिक्री में 7 प्रतिशत और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में 6 प्रतिशत की गिरावट आई है। वहीं निर्यात भी घटा है और .05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
मोटरसाइकिल की बिक्री घटी
सियाज के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल, 2019 में मोटरसाइकिल की बिक्री 11.81 प्रतिशत घटकर 10,84,811 यूनिट रही, जबकि पिछले साल अप्रैल, 2018 में यह संख्या 12,30,046 यूनिट की थी। वहीं अप्रैल 2019 में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री 16.36 फीसदी घटकर 16,38,388 यूनिट पर पहुंच गई, जबकि अप्रैल 2018 में यह आंकड़ा 19,58,761 यूनिट था।
सभी कंपनियों की बिक्री प्रभावित
बात प्रमुख ऑटो कपनियों की करें, तो मारुति की बिक्री में 19.61 प्रतिशत (1,31,385 यूनिट्स), ह्यूंदै मोटर्स की बिक्री में 10.12 प्रतिशत (42,005 यूनिट्स), महिन्द्रा एंड महिन्द्रा की बिक्री में 8.52 प्रतिशत की गिरावट आई है। जबकि दोपहिया वाहनों में हीरो मोटर कॉर्प की बिक्री 12.10 प्रतिशत घट कर 5 लाख 34 हजार और होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर्स की बिक्री में 25.77 प्रतिशत घट कर 1,57,569 यूनिट्स ही रही।
क्या है वजह
ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि नकदी की कमी और बीमा की लागत बढ़ने से ऑटो कंपनियों की सेल प्रभावित हुई है। वहीं चुनावों को भी गिरावट की वजह माना जा रहा है। इसके अलावा अगले साल अप्रैल, 2019 से नए उत्सर्जन मानक बीएस-6 लागू होने हैं, और अभी भी कई कंपनियों ने नए मानकों के अनुरुप इंजन लांच नहीं किए हैं। वहीं ग्राहक नई गाड़ी लेटेस्ट बीएस-6 इंजन वाली खरीदना चाहता है।
क्या होगा असर
ऑटो सेक्टर के विशेषज्ञों को अंदेशा है कि आगे भी हालात ऐसे बने रहे तो जॉब संकट गहरा सकता है। हालांकि अभी तक ऐसे हालात पैदा नहीं हुए हैं, लेकिन अगर गिरावट का यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है, जो ऐसे हालात का सामना करना पड़ सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि नई सरकार के आने के बाद स्थिरता आएगी, गिरावट कम होगी।