ऑटोमोबाइल डीलर्स बोले कंपनियां बढ़ाएं गाड़ियों पर बिक्री का मार्जिन, नहीं हो रहा है गुजारा!
- ऑटोमोबाइल डीलर्स ने सियाम को पत्र लिखा, बिक्री मार्जिन में बढ़ोतरी की मांग
- कम परिचालन मार्जिन की वजह से उनका मुनाफे में आ रही है लगातार कमी
विस्तार
ऑटोमोबाइल डीलर्स के संगठन फाडा ने घाटे से जूझ रहे डीलर्स के लिए राहत की मांग की है। फाडा ने वाहन निर्माता कंपनियों से प्रति वाहन बिक्री का मार्जिन बढ़ाने की मांग की है। फाडा का कहना है कि डीलरों को महंगी परिचालन लागत और मंदी के चलते आय में गिरावट को देखते हुए कम से कम प्रति वाहन सात फीसदी का बिक्री मार्जिन मिलना चाहिए।
तत्काल कार्रवाई की मांग
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (फाडा) ने ऑटोमोबाइल कंपनियों से कहा है कि कारोबार को आर्थिक दृष्टि से व्यावहारिक बनाने के लिए डीलरशिप पर लागत ढांचे में कम से कम 20 फीसदी की कमी लाई जाए। ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) को लिखे पत्र में फाडा के अध्यक्ष आशीष हर्षराज काले ने ऑरिजनल इक्विपमेंट मेकर्स (ओईएम) या वाहन कंपनियों की ओर से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऊंची लागत और कम परिचालन मार्जिन की वजह से उनका मुनाफे में लगातार कमी आ रही है।तीन से पांच फीसदी का मार्जिन
काले ने कहा कि जहां कर्मचारियों को भुगतान, ब्याज लागत और किराया आसमान छू रहा है वहीं डीलरों का मार्जिन खर्च की तुलना में नहीं बढ़ रहा है। काले ने कहा कि भारतीय डीलर काफी कम तीन से पांच फीसदी के मार्जिन पर काम करते हैं। काले का कहना है कि यह मार्जिन दुनिया के बाकी देशों के मुकाबले काफी कम है। उन्होंने कहा कि देश में वाहन डीलरशिप का कुल कारोबार पर औसत शुद्ध लाभ आधा से एक फीसदी तक ही है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि पिछले 15 माह के दौरान वाहन बाजार में सुस्ती की वजह से डीलरों का यह मार्जिन भी प्रभावित हुआ है।85 फीसदी लागत पर खर्च
बिक्री घटने से कई वाहन डीलर नुकसान में आ गए हैं। काले ने कहा कि भारत में डीलरशिप को कुल आमदनी का औसतन 85 फीसदी लागत पर खर्च करना पड़ता है। इसमें कर्मचारियों, ब्याज और इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च मुख्य रूप से शामिल है। उन्होंने पत्र में मांग की है कि बाजारी कीमत का न्यूनतम सात फीसदी मार्जिन डीलर्स को मिंलना चाहिए। वहीं सियाम ने भी फाडा के इस पत्र को अपनी कार्यकारी समिति को भेज दिया है। इस समिति में देश के प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। सियाम से जुड़े सूत्रों का कहना है कि संबंधित डीलर्स के बिक्री मार्जिंन बढ़ाने की मांग पर काम करने के लिए अलग-अलग ओईएम पर छोड़ने का पक्षधर है। वहीं पूरी दुनिया यूरोप और अमेरिका में पैसेंजर्स व्हीकल्स पर बिक्री मार्जिन 6 से 14 फीसदी तक है।