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Auto NBFC: ऑटो एनबीएफसी सेक्टर के रफ्तार में वृद्धि,अब सीवी और ग्रामीण सुधार पर ध्यान

Thu, 13 Nov 2025 02:19 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Thu, 13 Nov 2025 02:19 PM IST
सार

Auto NBFC: वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में ऑटो नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) सेक्टर में सुधार दिखा है। अब सेक्टर की गति व्यावसायिक वाहनों (सीवी) और ग्रामीण मांग में सुधार पर निर्भर करेगी। 
 

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Auto NBFC sector picks up pace focus now  CV rural recovery
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

ऑटो एनबीएफसी (वाहन ऋण देने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) के लिए वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही राहतभरी रही है। सेंट्रम की ताजा रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सेक्टर के वितरण गति में सुधार देखा गया है। जो कि पिछली तिमाही सुस्ती से उभरने का संकेत है।

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गैर-वाहन लोन ने दी ग्रोथ को नई दिशा

रिपोर्ट बताती है कि जिन कंपनियों ने अपने कारोबार को सिर्फ वाहन लोन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि गैर-वाहन ऋण (जैसे एसएमई, पर्सनल, होम और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन) की ओर कदम बढ़ाए, उन्होंने बेहतर ग्रोथ दर्ज की। इन नए लोन सेगमेंट्स ने कंपनियों को विविधता दी है और राजस्व का नया स्रोत बनाया है। 

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 सीवी और ग्रामीण बाजार बने भविष्य की चाबी

रिपोर्ट के अनुसार आने वाले महीनों में ऑटो एनबीएफसी सेक्टर का प्रदर्शन मुख्य रूप से कमर्शियल व्हीकल (व्यावसायिक वाहन) सेगमेंट और ग्रामीण मांग के सुधार पर निर्भर करेगा। दूसरी तिमाही में सीवी सेगमेंट में हल्का सुधार देखने को मिला है, जबकि पैसेंजर व्हीकल (पीवी) और सेकंड-हैंड वाहनों की मांग अभी भी स्थिर है। 

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सुंदरम टॉप पर, चोला सबसे धीमा

  • सुंदरम फाइनेंस ने शानदार प्रदर्शन किया, जिसमें 18.3 प्रतिशत वार्षिक वर्ष-दर-वर्ष (वाईओवाई) और 11प्रतिशत तिमाही-दर-तिमाही (क्यूओक्यू) ग्रोथ दर्ज की गई। यह ग्रोथ मुख्य रूप से रिटेल और एसएमई लोन से आई। 
  • श्रीराम फाइनेंस की ग्रोथ 7.6 प्रतिशत रही। जिसमें पहले की तुलना में कुछ धीमी, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले 2.9 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है।

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  • चोलामंडलम फाइनेंस (चोला) की ग्रोथ सबसे धीमी रही। इसने सिर्फ 0.5 प्रतिशत की मामूली ग्रोथ दर्ज की, क्योंकि कंपनी अपने पोर्टफोलियो को गैर-वाहन क्षेत्रों की ओर रीबैलेंस (फिर से संतुलित करना) कर रही है। 
  • महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज (एमएमएफएसएल) की ग्रोथ 2.7 प्रतिशत वार्षिक और 5.5 प्रतिशत तिमाही रही। कंपनी ने पिछली तिमाही की गिरावट से उभरते हुए सुधार दिखाया।

दिलचस्प बात यह है कि चोला ने वितरण में भले ही सुस्ती दिखाई हो, लेकिन कुल एयूएम (एसेट अंडर मैनेजमेंट) के मामले में वह 21 प्रतिशत वृद्धि के साथ सबसे आगे रही। (एयूएम यानी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां। इसका मतलब ऐसा कोई म्यूचुअल फंड या वित्तीय संस्थान जो अपने ग्राहकों की ओर से प्रबंधित की जा रही कुल परिसंपत्तियों जैसे स्टॉक, बॉन्ड, नकदी आदि का कुल बाजार मूल्य है।) 

पारंपरिक मॉडल से बाहर निकलना जरूरी

रिपोर्ट के मुताबिक पारंपरिक वाहन वित्तपोषण अब चक्रीय दबावों का सामना कर रहा है। ऐसे में जिन कंपनियों ने विविध लोन पोर्टफोलियो अपनाया है, वही आगे बढ़ने की स्थिति में है। गैर वाहन ऋण जैसे एसएमई, पर्सनल व होम लोन आने वाले समय में इस सेक्टर के मुख्य ग्रोथ इंजन साबित हो सकते हैं।

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