China Auto Market: दुनिया का सबसे बड़ा वाहन बाजार संकट में, इन कंपनियों की बिक्री में लगातार गिरावट
सरकारी सब्सिडी और टैक्स छूट खत्म होने से चीन के वाहन उद्योग पर बड़ा असर पड़ा है, इससे चीन के यात्री कार की ब्रिकी में गिरावट हुई है। वहीं, घरेलू मांग घटाने के बावजूद ईवी व हाइब्रिड वाहनों का निर्यात दोगुना हो गया है।
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दुनिया के सबसे बड़े वाहन बाजार चीन में अक्तूबर के महीने में ब्रिकी की रफ्तार धीमी रही। सरकारी ट्रेड इन सब्सिडी और टैक्स छूट चरणबद्ध रूप से खत्म होने से वाहन की ब्रिकी पर सीधा असर देखा गया है। चाइना एसोसिएशन ऑफ ऑटोमोबाइल-मैन्युफैक्चरर्स के आंकड़ो के मुताबिक अक्तूबर में चीन की यात्री कार ब्रिकी साल दर साल 4.4 प्रतिशत हो गई। सितंबर में यह वृद्धि 11.2 प्रतिशत हुई। जबकि अगस्त में यह 15.1 प्रतिशत थी। यानी लगातार तीसरे महीने बिक्री की रफ्तार घटती दिखी।
हालांकि ईवी व प्लग इन हाइब्रिड वाहनों का निर्यात दोगुना होकर करीब 2.5 लाख यूनिट तक पहुंच गया। वाहन निर्माता घरेलू मंदी की भरपाई विदेशी बाजारों में विस्तार के जरिए कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीन में सरकारी ट्रेड इन प्रोग्राम और टैक्स छूट ने बिक्री को बढ़ावा दिया था। इन योजना का उद्देश्य था कि लोग पुरानी गाड़ियों की जगह नई ईवी अपनाएं, लेकिन अब कई शहरों और प्रांताें ने इन योजनाओं को काट-छांट या बंद करना शुरू कर दिया है। अगले साल इन योजनाओं का जारी रहना भी मुश्किल बताया जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 तक घरेलू ब्रिकी में गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है।
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बीवाईडी व टेस्ला की ब्रिकी घटी
चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन की रिपोर्ट कहती है कि अक्तूबर में टेस्ला की चीन में ब्रिकी 36 प्रतिशत घटकर 26006 यूनिट बची। सितंबर में यह आंकड़ा 71525 यूनिट था। वहीं, चीन की दिग्गज ईवी कंपनी बीवाईडी की कुल ब्रिकी 12 प्रतिशत गिरकर 4.41 लाख यूनिट पर आ गई। कंपनी अब चीन में घटती मांग के बीच यूके और यूरोप जैसी विदेशी बाजारों में उपलब्धता बढ़ा रही है।
बाजार हिस्सेदारी में बदलाव
बीवाईडी की मार्केट शेयर में गिरावट आई है, जबकि गीली, एक्सपेंग और लीपमोटर जैसी कंपनियां बाजार में हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। तीव्र प्रतिस्पर्धा और ओवरसप्लाई के चलते वाहन निर्माताओं को अब कीमतें कम करनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रेंड अगले कुछ महीनों तक जारी रह सकता है।
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विदेशी बाजारों में बढ़ता फोकस
ईवी कंपनियां अब यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे तेजी से बढ़ते बाजारों पर ध्यान दे रही हैं। एलिक्सपार्टनर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक वैश्विक वाहन बाजार में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो अभी लगभग 21 प्रतिशत है।