Mangal Gochar 2024: मंगल का अपनी नीच राशि कर्क में गोचर, जानें कैसा होगा सभी पर प्रभाव
ग्रहों में सेनापति कहे जाने वाले मंगल 20 अक्टूबर 2024 को दोपहर करीब 03 बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि कर्क में गोचर कर चुके हैं।
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Mangal Gochar 2024: ऊर्जा, जोश, साहस, पराक्रम, युद्ध और रक्त का कारक ग्रह मंगल अब कर्क राशि में प्रवेश कर चुके हैं। ग्रहों में सेनापति कहे जाने वाले मंगल 20 अक्टूबर 2024 को दोपहर करीब 03 बजकर 04 मिनट पर चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि कर्क में गोचर कर चुके हैं। मंगल अब मिथुन राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए कर्क राशि में कुछ दिनों तक विराजमान रहेंगे। कर्क राशि मंगल की नीच राशि है। ऐसे स्थिति में मंगल का प्रभाव कुछ अच्छा नहीं रह सकता है। मंगल के अपनी नीच राशि में होने से नकारात्मक असर देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं मंगल का ज्योतिष शास्त्र में महत्व।
ज्योतिष में मंगल का महत्व
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का सेनापित का दर्जा प्राप्त है। मंगल युद्ध, उत्तेजना, क्रोध, साहस, आवेग, भूमि और सेना का कारक ग्रह माना जाता है। मंगल ग्रह को दो राशियों का स्वामित्व प्राप्त है पहला मेष और दूसरा वृश्चिक राशि। मंगल मकर राशि में उच्च के और कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं। वहीं मंगल चित्रा, मृगशिरा और धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामित्व हासिल है। मंगल एक से दूसरे राशि में गोचर करने के लिए करीब 45 दिनों का समय लेते हैं। मंगल ग्रह एक पुरुष प्रधान ग्रह हैं और मंगल का स्वभाव से उग्र ,ऊर्जा और भूमि का कारक माना गया है। अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल मजबूत स्थिति में हैं तो जातक बहुत ही साहसी और खतरों से खेलने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कठिन से कठिन चुनौतियों का सामना करने से नहीं घबरता है, बल्कि डटकर सामना करता है और अपने शत्रुओं या विपरीत परिस्थितियों पर आसानी से विजय प्राप्त करता है। वहीं अगर कुंडली में मंगल की स्थिति कमजोर है तो यह जातक बुरे काम करने वाला और अपराधी हो सकता है। मंगल के मजूबत होने पर व्यक्ति सेना और पुलिस महकमे में उच्च पदों को प्राप्त करता है। मंगल के शुभ होने पर व्यक्ति भूमि, भवन और अच्छे मकान का सुख भोगता है।
कुंडली में कमजोर मंगल
- - अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल कमजोर होता है तो व्यक्ति के ऊपर मंगल दोष आता है।
- - मंगल के कमजोर होने पर वैवाहिक जीवन में तनाव, अशांति और कलह की संभावना बनी रहती है।
- - कुंडली में मंगल के कमजोर होने पर जातक या जातिका का विवाह देरी से होता है और तमाम तरह की अड़चनें आती हैं।
- - मंगल की स्थिति अच्छी नहीं होने पर व्यक्ति जमीन-जायदाद और कोर्ट-कचहरी के चक्करों में फंसा रहता है।
- - मंगल के अशुभ होने पर व्यक्ति को संतान का सुख या इसके प्राप्ति होने में दिक्क्तों का सामना करना पड़ता है।
कुंडली में मजबूत मंगल
- - जब जातक की कुंडली में मंगल बली होता है तो वह साहसी और उत्साही होता है। वह अपने लक्ष्यों का जब तक हासिल नहीं कर लेता है तब तक हार नहीं मानता है।
- - मंगल के मजूबत होने पर जातक का आत्मविश्वास हमेशा ऊपर रहता है। ऐसे लोग जीवन में कठिन परिस्थितियों से नहीं घबराते हैं।
मंगल का नीच राशि में प्रवेश करने पर प्रभाव
- ज्योतिषीय नजरिए से मंगल का राशि परिवर्तन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहों के सेनापति मंगल का नीच राशि में आना अच्छा नहीं माना जाता है। मंगल के राशि परिवर्तन करने से शनि और मंगल के बीच षडाष्टक योग का निर्माण हुआ है। मंगल और शनि के बीच योग बनने कई तरह के अशुभ घटनाएं, प्राकृतिक आपदाएं और जन-धन हानि की संभावना है। मंगल के नीच राशि में परिवर्तन करने से कुछ राशियों के जातकों पर प्रतिकूल असर भी पड़ सकता है।
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