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39 साल की आयु में 31 गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे स्वामी विवेकानंद, ऐसे हुई थी उनकी मृत्यु

Wed, 04 Jul 2018 01:46 PM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 04 Jul 2018 01:46 PM IST
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swami vivekananda punyatithi, death anniversary
स्वामी विवेकानंद की जयंती
आज यानी 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की 116वीं पुण्यतिथि है। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाया था। आज भी उनके विचार हमारे जीवन में अनमोल मंत्र के रुप में काम आते हैं। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर जानते हैं स्वामी विवेकानंद से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें…
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swami vivekananda
स्वामी विवेकानन्द ने साल 1893 में शिकागो मे सबसे पहले पूरी दुनिया को भारत के धर्म और आध्यात्म के सार से परिचित कराया था। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत “मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनो” संबोधन के साथ की। स्वामी जी द्वारा यह वाक्य बोलते ही पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा और वहां उपस्थित हर व्यक्ति उनके विचारों से प्रभावित हुआ। जिस वजह से विदेशी मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिंदू नाम दिया था।
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swami vivekanand
विश्व धर्म सम्मेलन में हिन्दू धर्म पर प्रभावी भाषण देने के बाद वहां के अखबार 'न्यूयॉर्क हेरॉल्ड' ने विवेकानंद के लिए लिखा, 'इसमें कोई संदेह नहीं कि धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद सबसे महान व्यक्तित्व हैं। उन्हें सुनकर लगता है कि भारत जैसे ज्ञानी राष्ट्र में ईसाई धर्म प्रचारक भेजना मूर्खतापूर्ण है। वे यदि केवल मंच से गुजरते भी हैं तो तालियां बजने लगती हैं।'
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Vivekanand
विवेकानंद जब विश्व धर्म महासभा में भारत की तरफ से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने गए थे तो वहां के आयोजकों ने उन्हें परेशान करने के लिए उनके नाम के आगे शून्य लिख दिया था। जिसके बाद स्वामी विवेकानंद ने बिना घबराए स्टेज पर जाकर अपने भाषण की शुरूआत ही शून्य से कर डाली।
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स्वामी विवेकानंद - फोटो : SELF
4 जुलाई 1902 को विवेकानंद की मृत्यु हो गई थी। मशहूर बांग्ला लेखक मणिशंकर मुखर्जी की पुस्तक ‘द मॉन्क एज मैन’ में उनकी मृत्यु को लेकर बताया गया है कि मलेरिया, माइग्रेन, मधुमेह, निद्रा, यकृत, गुर्दे व दिल सहित 31 बीमारियों से जूझ रहे थें और यहीं बीमारियां उनकी मौत की वजह बनी थी।
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