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Budh Gochar 2025: बुध का कर्क राशि में गोचर, जानें मिथुन राशि वालों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव ?
Sun, 22 Jun 2025 05:28 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 22 Jun 2025 05:28 PM IST
सार
Budh Gochar 2025: 22 जून 2025 को रात 09 बजकर 17 मिनट पर बुध अपनी स्वराशि मिथुन की यात्रा को विराम देते हुए कर्क राशि में गोचर करेंगे। जानते हैं मेष राशि वालों पर किस तरह पड़ेगा प्रभाव।
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बुध गोचर 2025
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Budh Gochar 2025: ग्रहों के राजकुमार बुध 22 जून से 30 अगस्त 2025 तक कर्क राशि में विराजमान रहेंगे। बुध अपनी स्वराशि मिथुन से निकलकर अब अपने शत्रु चंद्रमा की राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। कर्क राशि में बुध के गोचर को अच्छा नहीं माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं बुध के गोचर करने से मिथुन राशि के जातकों पर किसी तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा। इसका ज्योतीष विश्लेषण करते हैं।
बुध का गोचर और मिथुन राशि पर प्रभाव
मिथुन राशि वालों के लिए बुध पहले और चौथे भाव के स्वामी होते हैं। 22 जून का बुध का मिथुन राशि में गोचर आपके दूसरे भाव में हुआ है दूसरा भाव परिवार और धन का होता है और दूसरे भाव में बुध का गोचर कुल मिलाकर अच्छे ही फल देते हैं। इसके अलावा लग्न के स्वामी का धन के भाव में जाना आपकी आर्थिक स्थितियों में इजाफा ही दिलाएगा। शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। इसके अलावा चौथे भाव के स्वामी का धन के भाव में गोचर होने से धन संबंधी मामलों के लिए अच्छा रहेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं में इजाफा होगा। वहीं बुध के गोचर करने से आपके अच्छी वाणी से समाज में मान-सम्मान को बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
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ज्योतिष में बुध ग्रह
- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सबसे छोटा और शुभ ग्रह माना जाता है।
- सभी नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है।
- बुधदेव को वाणी, व्यापार, गणित, तर्कशास्त्र, संचार, बुद्धि और त्वचा का कारक ग्रह माना जाता है।
- ज्योतिष में बुध को द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है। यानी बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ होते हैं उसकी के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
- मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व बुध देव को प्राप्त है।
- बुध शुभ ग्रहों के साथ होने पर शुभ फल और अशुभ ग्रहों के साथ होने पर अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह शुक्र,गुरु और बली चंद्रमा के साथ हों तो अच्छे फल प्रदान करते हैं। वहीं पापी ग्रहों के साथ होने पर जैसे राहु-केतु, शनि, सूर्य और मंगल तो अशुभ फल प्रदान करते हैं।
- बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से यह बार-बार अस्त हो जाते हैं।
- बुध ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती नक्षत्र के अधिपति ग्रह होते हैं।
- कुंडली में बुध के मजबूत होने पर व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ और राजनीति में कुशल होता है।
ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं। बुध को मिथुन और कन्या राशियों का स्वामी का ग्रह माना जाता है।
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बुध का गोचर और मिथुन राशि पर प्रभाव
मिथुन राशि वालों के लिए बुध पहले और चौथे भाव के स्वामी होते हैं। 22 जून का बुध का मिथुन राशि में गोचर आपके दूसरे भाव में हुआ है दूसरा भाव परिवार और धन का होता है और दूसरे भाव में बुध का गोचर कुल मिलाकर अच्छे ही फल देते हैं। इसके अलावा लग्न के स्वामी का धन के भाव में जाना आपकी आर्थिक स्थितियों में इजाफा ही दिलाएगा। शुभ परिणामों की प्राप्ति होगी। इसके अलावा चौथे भाव के स्वामी का धन के भाव में गोचर होने से धन संबंधी मामलों के लिए अच्छा रहेगा। भौतिक सुख-सुविधाओं में इजाफा होगा। वहीं बुध के गोचर करने से आपके अच्छी वाणी से समाज में मान-सम्मान को बढ़ाने में मददगार साबित होगा।
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- वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को सबसे छोटा और शुभ ग्रह माना जाता है।
- सभी नवग्रहों में बुध ग्रह को राजकुमार का दर्जा प्राप्त है।
- बुधदेव को वाणी, व्यापार, गणित, तर्कशास्त्र, संचार, बुद्धि और त्वचा का कारक ग्रह माना जाता है।
- ज्योतिष में बुध को द्विस्वभाव का ग्रह माना जाता है। यानी बुध ग्रह जिस ग्रह के साथ होते हैं उसकी के अनुसार फल प्रदान करते हैं।
- मिथुन और कन्या राशि का स्वामित्व बुध देव को प्राप्त है।
- बुध शुभ ग्रहों के साथ होने पर शुभ फल और अशुभ ग्रहों के साथ होने पर अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर बुध ग्रह शुक्र,गुरु और बली चंद्रमा के साथ हों तो अच्छे फल प्रदान करते हैं। वहीं पापी ग्रहों के साथ होने पर जैसे राहु-केतु, शनि, सूर्य और मंगल तो अशुभ फल प्रदान करते हैं।
- बुध सूर्य के सबसे नजदीक रहने वाले ग्रह हैं, जिस कारण से यह बार-बार अस्त हो जाते हैं।
- बुध ज्येष्ठा, आश्लेषा और रेवती नक्षत्र के अधिपति ग्रह होते हैं।
- कुंडली में बुध के मजबूत होने पर व्यक्ति बुद्धिमान, कूटनीतिज्ञ और राजनीति में कुशल होता है।
ज्योतिष शास्त्र में बुध को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति व्यक्ति के जीवन पर विशेष प्रभाव डालती हैं। यदि बुध जन्म कुंडली में लग्न भाव में हो, तो जातक संवाद में कुशल बनता है। इतना ही नहीं बुध के प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी बढ़ता है और वह शारीरिक रूप से सुंदर बनता है। यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में बुध कमजोर होता है, तो वह अक्सर बीमारियों से घिरा रहता है। इसके अलावा जातक पाचन शक्ति कमजोर, पेट दर्द और बालों की समस्याएं भी झेलता है। वहीं कुंडली में बुध की स्थिति सही न होने पर संवाद में दिक्कतें आने लगती है, जिस कारण रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही व्यापार में असफलता, नौकरी में तनाव और शिक्षा के क्षेत्र में बार-बार असफलताएं मिलने लगती हैं। बुध को मिथुन और कन्या राशियों का स्वामी का ग्रह माना जाता है।
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कुंडली में बुध को मजबूत करने के उपाय- बुधवार को भगवान गणेश को 11 मोदक का भोग लगाएं।
- बुधवार के व्रत रखें।
- बुधवार के दिन हरि चूड़ियों का दान करें।
- रोजाना आप बुध स्तोत्र का पाठ करें।
- बुध ग्रह से जुड़े मंत्रों का 108 बार जाप करें।
- यदि संभव हो, तो आप पन्ना रत्न भी धारण कर सकते हैं।
- बुधवार के दिन हरे रंग के वस्त्र पहनें।
- रोजाना तुलसी को जल चढ़ाएं।
- बुधवार के दिन गाय को घास खिलाएं।
- हरी मूंग की दाल का दान करें।
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