मंगल और राहु का बुध की राशि मिथुन में आना कई अप्रत्याशित घटनाओं को जन्म देगा। राहु मिथुन राशि में उच्च राशि के माने गए हैं। बुध के साथ उनकी युति राहु के दोष को तो कम करेगी लेकिन मंगल के कुदोष को बढ़ा देगी, क्योंकि मंगल के बुध शत्रु हैं। ऐसे में शत्रु के भाव में जाने से मंगल अपने आपको असहज महसूस करेंगे, लेकिन बुध मंगल को अपने बराबर समभाव रखते हैं। ऐसे में बुध की तरफ से कोई दिक्कत नहीं होगी।
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मेष
इस राशि के जातकों के पराक्रम भाव में मंगल राहु की युति साहसी और पराक्रमी तो बनाएगी, लेकिन स्वभाव में उग्रता लाएगी। परिवार में भाईयों से मतभेद बढ़ सकता है, इसलिए अपनी ऊर्जा, शक्ति का दुरुपयोग न होंने दें। शनि और केतु की दृष्टि प्रभाव में वृद्धि कराएगी, अत: इस समय का सदुपयोग करेंगे तो कामयाबियां आपके कदम चूमेंगी।
वृष
आपकी राशि के द्वितीय कुटुंब भाव में यह युति स्वभाव में उग्रता तो लाएगी, लेकिन आकस्मिक धन प्राप्ति के योग भी बनाएगी। वाहन सावधानीपूर्वक चलाएं। कोर्ट—कचहरी के मामले बाहर ही निबटा लें तो बेहतर रहेगा।
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मिथुन
इस राशि पर मंगल-राहु की युति और शनि-केतु की दृष्टि निश्चित रूप से जातकों के लिए बेहतर रहेगी लेकिन अपने उपर आलस्य न हावी होने दें और योजनाओं तब तक गुप्त रखें, जब तक उसे पूरा न कर लें। दांपत्य जीवन या ससुराल पक्ष से अनबन हो सकती है।
कर्क
इस राशि के लिए यह योग द्वादश भाव में बन रहा है। अधिक खर्च, विदेश यात्रा के साथ-साथ शत्रुमर्दी योग भी बनेगा। इस राशि के जातक को कर्ज के लेन-देन के समय सावधानी बरतनी चाहिए, अन्यथा दिया गया धन अटक सकता है।