नियमित रूप से वैदिक मंत्रोच्चार करने वालों का दिमाग होता है ज्यादा तेज, अध्ययन में सामने आई बात
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सनातन धर्म में पूजा पाठ में मंत्रोच्चार का बहुत महत्व माना जाता है। प्राचीन काल से ही हिंदू धर्म में ऋषि-मुनियों के द्वारा मंत्रोच्चार किया जाता है। यह सनातन धर्म की संस्कृति का एक अटूट हिस्सा है। जहां भी मंत्रोच्चार किया जाता है, वहां के पूरे वातावरण में सकारात्मकता का संचार होने लगता है, पूजा स्थलों पर प्रतिदिन मंत्रोच्चार किया जाता है यही कारण है कि वहां पर जाकर हम सूकुन और शांति का अनुभव करते हैं। मंत्रोच्चार करने का केवल धार्मिक या अध्यात्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। एक अध्ययन के मुताबिक नियमित रूप से वैदिक मंत्रोच्चार करने वाले व्यक्ति का दिमाग सामान्य व्यक्ति से कहीं ज्यादा तेज होता है। तो चलिए जानते हैं इस बारे में।
एसजीपीजीआई कैंपस स्थित सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) के अध्ययन में सीबीएमआर के ब्रेन मैपिंग विशेषज्ञ डॉ. उत्तम कुमार, डॉ. अंशिका सिंह व क्राइस्ट यूनिवर्सिटी बंगलुरु के साइकोलॉजी विभाग के डॉ. प्रकाश के द्वारा किए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो लोग बचपन से वैदिक मंत्रोच्चार करते हैं, उनका दिमाग सामान्य लोगों की अपेक्षा ज्यादा तेज होता है। अध्ययन के अनुसार बचपन से नियमित रूप से वैदिक मंत्रोच्चार करने से मस्तिष्क में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं, जिससे व्यक्ति की समझने की क्षमता, मानसिक संतुलन बेहतर होता है साथ ही इन लोगों की याद्दाश्त भी सामान्य लोगों से ज्यादा मजबूत होती है। इनकी तर्कशक्ति अन्यों की तुलना में बेहतर होती है।
सीबीएमआर के अध्ययन में 21 से 28 आयु वर्ग के 50 युवाओं को शामिल किया गया। जिसमें से 25 युवा ऐसे थे जो 9 से 11 साल तक गुरुकुल में रहकर चारों वेदों का अध्ययन करने के बाद लगातार वैदिक मंत्रोच्चार कर रहे हैं। तो वहीं इस अध्ययन में 25 ऐसे युवाओं को भी शामिल किया गया जो हिंदी, संस्कृत व अंग्रेजी जानते-समझते हैं और साथ ही प्रतिदिन संस्कृत लिखते और पढ़ते भी हैं लेकिन वे नियमित तौर पर मंत्रोच्चार नहीं करते हैं। इस अध्ययन के दौरान पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से मंत्रोच्चार कर रहे हैं उन्हें 20,000 पत्र व श्लोक कंठस्थ हैं।
दूसरे ग्रुप में 25 ऐसे युवाओं को लिया गया जो हिंदी, संस्कृत व अंग्रेजी जानते-समझते हैं। वे संस्कृत लिखते पढ़ते लेकिन नियमित तौर पर मंत्रोच्चार नहीं करते। डॉ. कुमार के अनुसार कि मंत्रोच्चार करने वालों में मस्तिष्क की मेमोरी (हिप्पोकैप्सर) का स्कोर सामान्य की लोगों की अपेक्षा अधिक मिला। इसके साथ ही पाया गया कि जो लोग मंत्रोच्चार करते हैं उनके न्यूरॉन की मोटाई अधिक होती है, जिससे तेजी के साथ मस्तिष्क तक संदेश पहुंचता है। इसके साथ ही इनमें गायरिस में बदलाव के कारण रिकॉल क्षमता ज्यादा हो जाती है। वैदिक मंत्रोच्चार करने वालो में सकारात्मकता और याद्दाश्त तेज होती है।
श्लोक या फिर मंत्र का उच्चारण करते समय सांस की गति पर नियंत्रण रखना बहुत ही आवश्यक होता है। नियमित रूप में मंत्रोच्चार करते रहने से ईश्वर की कृपातो प्राप्त होती ही है साथ ही में इससे दिमाग को संदेश की सक्रियता देने वाले न्यूरॉन्स में धीरे-धीरे बदलाव आरंभ हो जाता है। कुछ समय बाद यह सब बदलाव स्थायी हो जाते हैं और व्यक्ति का दिमाग अधिक सक्रियता के साथ कार्य करना शुरू करता है।