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रामायण: माता सीता को प्रभु श्रीराम ने क्यों छोड़ा था, जानिए क्या है सच्चाई

Wed, 22 Apr 2020 04:31 PM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 22 Apr 2020 04:31 PM IST
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know the reason Why Lord Rama leave to mata Sita
रामानंद सागर की रामायण का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

रामायण कथा के अनुसार हम जानते हैं कि जब लंका विजय करने के बाद प्रभु श्रीराम माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे तो उनका स्वागत बहुत ही भव्य रूप में हुआ था। अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाए थे। लेकिन रामायण का ये स्याह पक्ष भी है कि माता सीता को अपनी पवित्रता का प्रमाण देने के लिए अग्नि परीक्षा भी देनी पड़ी। यहां तक कि उन्हें राज्य से बाहर जंगलों में भी जाना पड़ा। भगवान श्रीराम ने माता अयोध्या को क्यों छोड़ा? इसके पीछे का कारण क्या है?

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जब भगवान श्रीराम को 14 वर्षों का वनवास हुआ तो वे अकेले ही वनवास जाना चाहते थे। लेकिन माता सीता ने उनके साथ चलने का निर्णय लिया। ये माता सीता का स्वतंत्र निर्णय था। जंगल में माता सीता का रावण अपहरण कर लेता है। इसी मूल कारण को लेकर भगवान श्रीराम ने लंका की चढ़ाई की और रावण का वध किया। जब श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या वापस आए तो कुछ दिनों बाद श्रीराम के गुप्तचरों ने उनसे कहा कि प्रजा में माता सीता की पवित्रता पर संदेह किया जा रहा है। 
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इसी संदेह के कारण माता सीता को अग्नि परीक्षा भी देनी पड़ी। लेकिन इसके बाद ही माता सीता की पवित्रता पर सवाल उठाए जा रहे थे। तब प्रभु श्रीराम को पिता दशरथ के द्वारा सिखाया गया राजधर्म याद आ गया। जिसमें राजा दशरथ ने कहा था कि, एक राजा का अपना कुछ नहीं होता है। सबकुछ राज्य का हो जाता है। बल्कि आवश्यकता पड़ने पर यदि राजा को अपने राज्य और प्रजा के हित के लिए अपनी स्त्री, संतान, मित्र यहां तक की प्राण भी त्यागने पड़े तो उसमें संकोच नहीं करना चाहिए। क्योंकि राज्य ही उसका मित्र है और राज्य ही उसका परिवार है। प्रजा की भलाई ही उसका स्रवोपरि धर्म है।
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इस कारण भगवान श्रीराम ने अपने राजधर्म का पालन करते हुए माता सीता को छोड़ने का मन बना लिया। सीता जब गर्भवती थीं तब उन्होंने एक दिन प्रभु राम से तपोवन घूमने की इच्छा व्यक्त की। श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि वे सीता को तपोवन में छोड़ आएं। लक्ष्मण ने तपोवन में पहुंचकर अत्यंत दुखी मन से सीता से कहा- 'माते, में आपको अब यहां से वापस नहीं ले जा सकता, क्योंकि यही आज्ञा है।

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