होली का पर्व यूं तो आठ दिन पहले से ही शुरु हो जाता है लेकिन रंगोत्सव से एक दिन पहले का दिन यानी फाल्गुन पूर्णिमा का दिन बड़ा ही खास होता है। इस दिन हर साल होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन के साथ ही होली के गुलाल और रंग उड़ने लगते और हर तरफ मस्ती का माहौल छा जाता है।
इस साल फाल्गुन पूर्णिमा 5 मार्च को है इसलिए होलिका का दहन इसी दिन किया जाएगा। होलिका दहन का एक पांरपरिक रिवाज है जिसके अनुसार एक महीने पहले माघ पूर्णिमा के दिन गुलर वृक्ष की टहनी को गांव या मोहल्ले के बाहर गाड़ दिया जाता है और फाल्गुन पूर्णिमा की सांयकाल के समय सभी लोग मिलकर लकडियां, सूखे उपले, खर-पतवार इत्यादि को उस टहनी के चारों ओर एकत्र करते हैं और जलाते हैं। इसे ही होलिका दहन कहते हैं।
होलिका दहन करने से पूर्व इसकी पूजा की जाती है और होलिका दहन करने के मुहूर्त भी देखा जाता है। माना जाता है कि होलिका दहन अशुभ मुहूर्त में होने पर उस गांव और समाज पर बुरा प्रभाव पड़ता। गांव और समाज की खुशहाली की भविष्यवाणी भी होलिका की अग्नि से की जाती है।
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