सुख-दुख, सफलता-असफलता ,विरह-मिलन जीवन के अभिन्न अंग हैं। लेकिन कब इनका सामना करना पड़ेगा, कब ये मार्ग में अवरोध उत्पन्न करेंगे और कब यही सहायक बनेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। शास्त्रों और मनीषियों के अनुसार सुख और दुख ग्रहों की ही देन हैं।
अध्ययन और निरीक्षण से भी यही सामने आता है। जो भी हो, ग्रह नक्षत्रों की स्थिति से मिलने वाले संकेत मनुष्य के हाल हवाल और अगले पिछले जन्मों की सूचना देते हैं। यह निश्चित है कि ग्रह नक्षत्र मनुष्य की परिस्थितियों को नियंत्रित तो करते हैं पर उसके स्तर, माहौल और मेहनत को प्रभावित करते। तभी तो एक ही समय और स्थान पर जन्म लेने वाले सभी बच्चे एक समान सफलता को प्राप्त नहीं करते। उनमे कोई बड़े परिवार में तो कोई मजदूर किसान के घर पैदा होता है।
पढें, शादी से पहले अपनी राशि से जानें जरूर बातेंकिसी भी व्यक्ति के निर्माण में आर्थिक, शैक्षिक, पारिवारिक और सामाजिक वातावरण ग्रहों से अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इसी प्रकार युग के बदलाव का भी प्रभाव थोडा–परिवर्तन अवश्य देगा। किसी कन्या की कुण्डली मे शीघ्र विवाह का योग पुराने जमाने में बाल-विवाह का संकेतक था तो इन दिनों 18 वर्ष के तुरंत बाद का।
इसी प्रकार मजबूत पत्नी-पक्ष किसी युग में घर के काम-काज में सुघड़ पत्नी का द्योतक होता था तो आज के युग में पढी-लिखी नौकरी पेशा पत्नी का संकेत करता है। इसलिए अगर आपकी कुण्डली में सुयोग्य पत्नी के योग हैं तो आपको भी पढ़ी लिखी और कामकाजी जीवनसंगिनी प्राप्त होगी।
ज्योतिष एक विज्ञान है। इस विधा में निरंतर खोज होती रहती हैं, प्रयोग भी होते हैं। विज्ञान की दूसरी विधाओं की तरह ज्योतिष में भी हर दिन उसमे शोध और अनुसंधान आवश्यक होते हैं। इन दिनों हो रहे अध्ययन और अनुसंधानों के कारण ही अब यह संभव हो चला है कि पहले से ज्यादा सफल, सही और सटीक भविष्यवाणी कर पा रहे हैं।