कुमाऊं से गढ़वाल तक इन दिनों रामलीलाओं का मंचन हो रहा है, लेकिन आधुनिकता के बीच रामलीला का पारंपरिक स्वरूप बदलता नजर आ रहा है। श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में उफल्डा, श्रीकोट, भक्तियाना समेत पांच से सात स्थानों पर रामलीलाएं हो रही हैं। कुछ मंचों पर शूर्पणखा के किरदार में गढ़वाली गीत 'दर्जी दिदा' और फिल्मी गीत 'मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं' पर नृत्य प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। वहीं, पारंपरिक छंद, दोहे, चौपाइयां और रागनियां पीछे छूटती नजर आ रही हैं। इस पर रामलीला से दशकों से जुड़े वरिष्ठ नागरिकों और रंगकर्मियों ने चिंता जताई है।