ठंड का मौसम शुरू होते ही श्रीनगर उपजिला चिकित्सालय में जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द से पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अस्पताल में रोजाना ऐसे 10 से 12 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड में गठिया (आर्थराइटिस) और बायू रोग के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं।उपजिला चिकित्सालय के आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सचिन चौबे ने बताया कि आजकल अस्पताल में ऐसे मरीज ज्यादा आ रहे हैं जिनके जोड़ों में दर्द, सूजन और सुबह उठने पर जकड़न बनी रहती है। कई मरीज तो सुबह बिस्तर से उठने या गिलास तक उठाने में भी असमर्थ होते हैं। कुछ देर जोड़ों को हिलाने से आराम मिलता है, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो इसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। उपजिला चिकित्सालय श्रीनगर आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. सचिन चौबे ने बताया कि ठंडी हवाओं में रक्त संचार धीमा पड़ने से छोटे जोड़ अधिक प्रभावित होते हैं। लोग दर्द को साधारण मानकर टाल देते हैं, जबकि यही आगे चलकर गठिया में बदल सकता है। डॉ. चौबे ने बताया कि गठिया दो प्रकार का होता है।पहला, उम्र बढ़ने के साथ बड़े जोड़ों को प्रभावित करने वाला ऑस्टियोआर्थराइटिस,और दूसरा, छोटे जोड़ों में सूजन और दर्द करने वाला रुमेटीइड गठिया, जो किसी भी उम्र में हो सकता है। उन्होंने बताया कि पहले यह समस्या मुख्यतः 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखी जाती थी, खासकर महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद, परंतु अब युवाओं में भी गठिया तेजी से बढ़ रहा है। इसके पीछे मोटापा, गतिहीन जीवनशैली और खेल संबंधी चोटें प्रमुख कारण हैं।