देवाल। बधाण की मां नंदा की डोली व लोकजात यात्रा देर शाम निर्जन पडाव गैरोली पातल पहुंची। जबकि बडीजात में शामिल दशौली व बंड की डोली वेदनी बुग्याल पहुंची। बृहस्पतिवार को वाण गांव से शुरू हुई यात्रा का कारवां अब उच्च हिमालय के निर्जन और दुर्गम क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है। पारंपरिक रीति-रिवाजों और लोक वाद्यों की थाप के बीच मां नंदा की डोली नंदा लोकजात यात्रा एवं बड़ीजात यात्रा में शामिल सभी डोलियाँ व देव छतोलियां वाण गांव से आगे के लिए रवाना हुईं। बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे बधाण की डोली ने वाण से गैरोली के लिए, जबकि बडीजात की डोली व छतोलियों ने प्रातः आठ बजे वेदनी के लिए प्रस्थान किया। खड़ी चढ़ाई को पार करते हुए देर शाम डोली व छतोली निर्जन पड़ाव गैरोली पातल व वेदनी पहुंचे, जहां रात्रि विश्राम हुआ। शुक्रवार को बधाण की डोली वेदनी बुग्याल पहुंचेगी। वेदनी में सप्तमी की जात संपन्न होने के बाद राज राजेश्वरी मां नंदा की डोली वापस बांक गांव के लिए प्रस्थान करेंगे। वही बडीजात की डोली वेदनी में पूजा के बाद अगले पडाव के लिए प्रस्थान करेंगे। 20 सितम्बर को होमकुंड में जातकर वापस होगी।