मथुरा जिले में पारंपरिक कारीगरों और शिक्षित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संचालित योजनाओं से स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत अब तक 4100 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 3555 कारीगरों को टूल किट वितरित की गई है। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक है। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों की आजीविका के साधनों को मजबूत करना है। इसके तहत बढ़ई, दर्जी, लोहार, कुम्हार, हलवाई, नाई, राजमिस्त्री और हस्तशिल्पियों सहित अन्य पात्र कारीगरों को कौशल वृद्धि के लिए 10 दिवसीय निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद संबंधित ट्रेड में आधुनिक तकनीक पर आधारित उन्नत किस्म की टूल किट उपलब्ध कराई जाती है। इससे कारीगरों को अपने काम को बेहतर तरीके से करने और आय बढ़ाने में मदद मिलती है। वहीं, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्योग स्थापित करने में सहायता दी जा रही है। योजना के तहत उद्योग एवं सेवा क्षेत्र में अधिकतम पांच लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण और 10 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान है। जिले में अब तक 2976 लाभार्थियों को 1181.50 लाख रुपये की धनराशि वितरित कर लाभान्वित किया जा चुका है। उपायुक्त उद्योग चंद्रभान सिंह ने बताया कि सभी लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से टूलकिट दी जा रही है। अब अगले चरण में टूलकिट वितरण की तारीख तय की जाएगी। इन लाभार्थियों में 2125 महिलाओं ने सिलाई मशीन के लिए आवेदन किया है।