कानपुर में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक संदेश दिया गया है। सुलह अधिकारी डॉ. धीरेंद्र कुमार दोहरे ने स्पष्ट किया है कि जब तक माता-पिता जीवित हैं, तब तक बच्चे संपत्ति के मालिक नहीं, बल्कि मात्र 'लाइसेंसी किराएदार' की हैसियत रखते हैं। यदि संतान अपने बुजुर्ग माता-पिता को प्रताड़ित या परेशान करती है, तो अधिनियम के कड़े प्रावधानों का उपयोग कर उन्हें घर से बेदखल किया जा सकता है।