सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही केदारी और हेतमापुर गांव के पास कटान तेज हो गई है। नदी की धारा लगातार खेतों को अपने आगोश में ले रही है। दोनों गांवों की करीब 270 बीघे फसल नदी में समा चुकी है। इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वहीं कटान को लेकर बाढ़ खंड विभाग के अधिकारियों के प्रति ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। ग्रामीणों के मुताबिक श्रीकेशन, गुड्डू मिश्रा, अमीन दरजी, इब्राहिम, बड़कऊ, आदिल समेत कई किसानों के खेत धीरे-धीरे नदी में समाते जा रहे हैं। खेतों में खड़ी फसल और उपजाऊ जमीन नदी की धारा में विलीन हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कटान शुरू होने से पहले ही प्रभावी इंतजाम कर दिए जाते तो शायद उनकी फसल और जमीन को नदी में समाने से बचाया जा सकता था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग की ओर से प्रभावी कार्य नहीं किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी और कर्मचारी सड़क किनारे लगे पेड़ों की डालियां काटकर उन्हें कटान वाले स्थानों पर नदी में डाल रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे कटान रोकने में कोई खास फायदा नहीं हो रहा है, लेकिन विभागीय स्तर पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। कटान की रफ्तार लगातार बढ़ने से किसानों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कटान रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा सकती है। इससे गांवों के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है।