किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए शनिवार को एसएन मेडिकल कॉलेज उम्मीद की नई किरण बन गया। एसजीपीजीआई लखनऊ की टीम की निगरानी में पहला किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। ये सुविधा शुरू होने से आसपास के जिलों के हजारों मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। एसएन मेडिकल कॉलेज किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला प्रदेश का दूसरा सरकारी चिकित्सा संस्थान बन गया। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए एसजीपीजीआई की टीम शुक्रवार को ही पहुंच गई थी। दो मरीजों की चिकित्सकीय रिपोर्ट जांचने के बाद शनिवार को सिकंदराराऊ निवासी महेंद्र कुशवाहा (32) की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। उन्हें पत्नी मीना कुशवाहा ने किडनी दी। एसजीपीजीआई की टीम ने सुबह 10 बजे ऑपरेशन करना शुरू किया। सबसे पहले दाता की किडनी निकाली गई और फिर मरीज के लगाई गई। प्रक्रिया में कुल आठ घंटे का समय लगा। शाम छह बजे तक दोनों की सर्जरी हो गई और फिर उन्हें आइसोलेट चैंबर में रखा गया। दूसरे मरीज का ट्रांसप्लांट अगले चरण में किया जाएगा। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि मेडिकल काॅलेज के लिए ये ऐतिहासिक दिन है। हम अंग प्रत्यारोपण की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। भविष्य में हार्ट, फेफड़े, लिवर समेत अन्य अंगों का प्रत्यारोपण भी हो सकेगा। शुरू के कुछ ऑपरेशन एसजीपीजीआई की टीम की निगरानी में होंगे। बाद में स्थानीय टीम ही ट्रांसप्लांट करेगी। इससे पहले प्रदेश में सिर्फ एसजीपीजीआई लखनऊ में ही किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा थी। सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के किडनी रोग विभाग को ट्रांसप्लांट से पहले सैनिटाइज किया गया। ऑपरेशन थिएटर में नो एंट्री जोन बनाया गया। एसजीपीजीआई और एसएन की कुल 30 सदस्यीय चिकित्सकीय टीम शामिल रही।