आगरा के 20 लाख से ज्यादा लोगों की सांसों पर संकट छाया है। तापमान कम होने और लगातार खोदाई से धूल के गुबार शहर की सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। आगरा स्मार्ट सिटी ने 39 चौराहों पर नए पर्यावरण सेंसर लगाए हैं, जिनमें 38 का डाटा सोमवार से उपलब्ध होना शुरू हो गया। इनमें दो चौराहों पर खतरनाक, तीन पर बेहद खराब और 27 चौराहों पर हवा की गुणवत्ता खराब मिली। वहीं, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के शहर में लगे छह स्टेशनों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) मध्यम पाया गया। जिन जगहों पर स्मार्ट सिटी ने खतरनाक हवा बताई वहां यूपीपीसीबी के आंकड़े संतोषजनक थे। इससे सांसों के साथ भरोसे का भी संकट खड़ा हो गया है। सीएम ग्रिड योजना के तहत शहर में जिन पांच जगहों पर 12 किमी. लंबी सड़कों की खोदाई का काम चल रहा है, उनसे जुड़े हुए सभी चौराहों पर आगरा स्मार्ट सिटी के पर्यावरण सेंसरों ने एक्यूआई के साथ सूक्ष्म कणों पीएम-10 की मात्रा को बेहद खतरनाक स्तर पर बताया। बारहखंभा पर रेलवे पुल के निर्माण और धूल उड़ने का असर एक्यूआई पर दिखा। अर्जुन नगर तिराहा पर 863 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक धूलकण पाए गए, जो शहर में सबसे ज्यादा हैं। यहां पूरे दिन जाम और धूल उड़ने का असर नजर आया। राजामंडी में सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रही सड़क की खोदाई से धूल कण 698 दर्ज किए गए, जबकि राजेश्वर मंदिर के पास इंदिरापुरम में खोदाई से धूल कणों की मात्रा 456 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पाई गई।