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शिमला पुलिस का नशा तस्करों पर शिकंजा, 4.30 करोड़ की संपत्ति फ्रीज

एएसपी शिमला मेहर पंवार ने कहा कि नशा तस्करी के खिलाफ शिमला पुलिस ने कार्रवाई का दायरा नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी से आगे बढ़ाते हुए उनकी संपत्तियों तक पहुंचाया है। सदर थाना क्षेत्र में दर्ज एक एनडीपीएस मामले की जांच के दौरान करीब 4 करोड़ 30 लाख रुपये की संपत्ति फ्रीज किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की जांच में मामले से जुड़े आरोपियों के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज की पड़ताल की गई। इसी वित्तीय जांच के दौरान आरोपियों से जुड़ी चल और अचल संपत्तियों की पहचान की गई। फ्रीज की गई संपत्तियों में कई लग्जरी गाड़ियां, जमीन के प्लॉट, आवासीय मकान और होमस्टे शामिल बताए गए हैं। कार्रवाई का उद्देश्य नशा तस्करी से जुड़े कथित आर्थिक नेटवर्क पर शिकंजा कसना और अपराध से अर्जित संपत्ति को कानून के दायरे में लाना है। शिमला पुलिस इससे पहले भी एनडीपीएस मामलों में वित्तीय जांच के जरिए नशा तस्करों की संपत्तियों पर कार्रवाई कर चुकी है। अगस्त 2026 में पुलिस ने पंजाब के एक कथित नशा तस्कर से जुड़ी करीब 2.09 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी। इसमें कई वाहन, व्यावसायिक संपत्तियां, आवासीय मकान और बैंक में जमा राशि शामिल थी। जुलाई 2026 में भी शिमला पुलिस ने दो एनडीपीएस मामलों में 2.28 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त किए जाने की जानकारी दी थी। पुलिस के अनुसार इनमें 16 वाहन, आवासीय अपार्टमेंट और अन्य संपत्तियां शामिल थीं। शिमला पुलिस की हालिया कार्रवाई से स्पष्ट है कि नशा तस्करी के मामलों में वित्तीय जांच को भी जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। सितंबर में ठियोग के एक एनडीपीएस मामले में पुलिस ने 1.64 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सीज की थी। जांच में जमीन, दुकान, वाहन और बैंक-डाकघर खातों में जमा धनराशि की पहचान की गई थी। कानूनी तौर पर एनडीपीएस अधिनियम के अध्याय VA में अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान, उन्हें फ्रीज या जब्त करने और बाद में सक्षम प्राधिकारी की प्रक्रिया के तहत जब्ती की व्यवस्था है। संपत्ति फ्रीज करने के आदेश को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष भेजा जाता है और आगे की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होती है। शिमला पुलिस की इस कार्रवाई में फ्रीज की गई करीब 4.30 करोड़ रुपये की संपत्तियों को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। जांच के आधार पर यह भी तय होगा कि संबंधित संपत्तियों का नशा तस्करी से कथित संबंध किस स्तर तक स्थापित होता है।

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