मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जब संदेश कुछ सेकंड में दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच जाता है, ऐसे समय में पुराने डाक टिकट और पोस्टकार्ड लोगों को उस दौर की याद दिला रहे हैं, जब चिट्ठियां ही संवाद का सबसे खास जरिया हुआ करती थीं। शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में इन दिनों डाक टिकटों की इसी पुरानी और रोचक दुनिया को करीब से देखने का मौका मिल रहा है। यहां शिमला डाक मंडल की ओर से सिमपेक्स-2026 जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। दो दिवसीय प्रदर्शनी में अलग-अलग दौर के दुर्लभ डाक टिकट, पुराने पोस्टकार्ड और पोस्टमार्क प्रदर्शित किए गए हैं। इन संग्रहों के माध्यम से डाक व्यवस्था के विकास के साथ-साथ बीते समय की सामाजिक और ऐतिहासिक झलक भी देखने को मिलती है। प्रदर्शनी में ब्रिटिश काल से जुड़ी फिलाटेलिक सामग्री विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पुराने टिकटों और डाक सामग्री के जरिए उस दौर की कई यादें यहां संजोई गई हैं। आयोजकों के अनुसार प्रदर्शनी में प्रख्यात फिलाटेलिस्टों के पुरस्कार प्राप्त संग्रह भी लोगों के लिए प्रदर्शित किए गए हैं। दुर्लभ डाक टिकटों और ऐतिहासिक सामग्री को एक जगह देखना डाक टिकट संग्रह में रुचि रखने वालों के लिए खास अनुभव है। इस आयोजन की एक खास बात यह है कि इसमें केवल शिमला जिले के निवासियों की प्रविष्टियों को शामिल किया गया है। यानी प्रदर्शनी में स्थानीय संग्रहकर्ताओं के दुर्लभ और दिलचस्प संग्रह देखने को मिल रहे हैं। डाक टिकटों की इस दुनिया से नई पीढ़ी को जोड़ने की कोशिश भी प्रदर्शनी में नजर आ रही है। 16 स्कूलों के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया है। इससे बच्चों को फिलाटेली के साथ इतिहास और पुरानी संचार व्यवस्था को समझने का अवसर मिल रहा है। प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। डाक टिकटों का संग्रह महज शौक नहीं, बल्कि इतिहास को सहेजने का एक तरीका भी है। पुराने टिकटों, पोस्टकार्ड और पोस्टमार्क में किसी दौर की घटनाओं, व्यक्तित्वों, संस्कृति और डाक व्यवस्था की कहानी दर्ज होती है। यही वजह है कि गेयटी थियेटर में लगी यह प्रदर्शनी पुराने दौर और नई पीढ़ी के बीच एक दिलचस्प सेतु का काम कर रही है।