भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश ने मजदूरों और कर्मचारियों के हितों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर सरकार के समक्ष मांगें उठाई हैं। संघ के मीडिया प्रभारी प्रदीप सिंह तोमर ने कहा कि मजदूरों को महंगाई के दौर में सम्मानजनक जीवनयापन के लिए बेहतर वेतन और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने सरकार से न्यूनतम वेतन सहित विभिन्न मांगों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। संघ की प्रमुख मांग है कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 30 हजार रुपये मासिक किया जाए। इसके साथ ही ईएसआईसी की मौजूदा 21 हजार रुपये की वेतन सीमा को बढ़ाकर 42 हजार रुपये करने की मांग की गई है, ताकि अधिक संख्या में कर्मचारी इस सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आ सकें। प्रदीप सिंह तोमर ने ईपीएस-95 के तहत 7500 रुपये मासिक पेंशन देने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनधारकों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त मासिक पेंशन मिलनी चाहिए। इसी तरह ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने की मांग रखी गई है। संघ का कहना है कि लंबे समय तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ग्रेच्युटी की सीमा में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। भारतीय मजदूर संघ ने आशा, आंगनवाड़ी, मिड डे मील, एनएचएम सहित सभी स्कीम वर्करों को नियमित करने की मांग की है। इसके अलावा आउटसोर्स के माध्यम से कार्य कर रहे कर्मचारियों को भी नियमित करने की मांग उठाई गई है। संघ का कहना है कि लंबे समय से विभिन्न विभागों और योजनाओं में सेवाएं दे रहे इन कर्मचारियों को रोजगार की स्थिरता और नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं मिलनी चाहिए। प्रदीप सिंह तोमर ने हिमाचल प्रदेश के उन निगमों और बोर्डों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) लागू करने की मांग भी उठाई, जहां यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अपने प्रचार में ओपीएस देने की घोषणा की थी, लेकिन निगम-बोर्ड के कर्मचारियों को इससे बाहर रखा गया। इससे कर्मचारियों में निराशा और आक्रोश है। संघ ने सरकार से इन सभी मांगों पर बिना देरी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कर्मचारियों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों का समाधान कर उन्हें सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध करवाने की बात कही है।