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तेजाजी मेले में अनोखा नजारा: मंच पर घुड़ले ने जीभ पर रखा जिंदा नाग, हजारों श्रद्धालुओं ने देखा दृश्य; वीडियो

Tue, 22 Sep 2026 10:25 AM IST
दौसा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा

दौसा जिले के सैथल उपखंड की ग्राम पंचायत सिण्डोली की निमड्या ढाणी में चल रहे लोक देवता वीर तेजाजी महाराज के 32वें दो दिवसीय मेले में मंगलवार रात एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने हजारों श्रद्धालुओं का ध्यान खींच लिया। तेजाजी के घुड़ले देवीसहाय मीणा ने मंच पर मौजूद लोगों के सामने एक जिंदा काले नाग को अपनी जीभ पर रखवाया। इस दौरान नाग के जीभ पर डसने का दावा किया गया। इसके बाद मेला परिसर में जय वीर तेजाजी और जय नाग देवता के जयकारे गूंज उठे।

श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी
श्रीवीर तेजाजी सेवा समिति की ओर से आयोजित इस मेले में मंगलवार को श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ उमड़ी। हजारों भक्त सुबह से ही तेजाजी मंदिर में प्रसादी चढ़ा रहे थे। रात में सेठ सांवरिया म्यूजिकल ग्रुप एंड पार्टी के गायक कलाकार रूपसिंह की भजन संध्या चल रही थी। भजनों पर श्रद्धालु झूम रहे थे। इसी दौरान मेला संचालक श्यामभाई महेश्वरा ने मंच से घोषणा की कि अब तेजाजी के घुड़ले नाग देवता के दर्शन कराएंगे। घोषणा के बाद भीड़ में उत्सुकता बढ़ गई।

एक जिंदा काला नाग था
घुड़ले देवीसहाय मीणा तेजाजी के वेश में मंच पर आए। उनके हाथ में एक जिंदा काला नाग था। पुजारी ने मंत्रोच्चार शुरू किया और घुड़ले ने उस नाग को अपनी जीभ पर रख लिया। कार्यक्रम के दौरान नाग ने घुड़ले की जीभ पर डसा और कुछ देर तक जीभ पर लटका रहा। यह दृश्य देखकर हजारों श्रद्धालु हैरान रह गए। महिलाओं ने हाथ जोड़ लिए, जबकि पुरुषों ने तेजाजी महाराज के जयकारे लगाए। करीब दो मिनट तक नाग जीभ पर रहा। इसके बाद घुड़ले ने नाग को हटाकर वापस टोकरी में रख दिया और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि तेजाजी महाराज को सर्पदंश से जुड़ी विशेष आस्था के कारण पूजा जाता है और इसी परंपरा से जुड़े घुड़लों के कार्यक्रमों में भी ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं।

पंडाल छोटा पड़ा, छतों और पेड़ों पर बैठकर देखी भजन संध्या
मेले में भीड़ इतनी ज्यादा थी कि समिति की ओर से लगाया गया 2,000 लोगों का विशाल पंडाल भी छोटा पड़ गया। कई श्रद्धालुओं को आसपास के मकानों की छतों और नीम के पेड़ों पर चढ़कर भजन संध्या देखनी पड़ी। सिण्डोली के अलावा कालीपहाड़ी, तलावड़ा, झेरा, सिकराय, महवा, मंडावरी सहित दर्जनों गांवों से हजारों भक्त मेले में पहुंचे। इससे पहले दिन में मनमोहक झांकियों ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। तेजाजी के जीवन पर आधारित झांकी में गायों की रक्षा के लिए तेजाजी द्वारा अपने प्राण देने का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसे देखकर कई श्रद्धालु भावुक हो गए। गायक रूपसिंह ने तेजाजी थारा डंका बाजे, नाग देवता थारी महिमा भारी जैसे भजनों से ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे।

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युवा नेता बोले- यही हमारी संस्कृति है
कार्यक्रम में पहुंचे युवा नेता राकेश मीना कालीपहाड़ी ने कहा कि ऐसे आयोजन लोक देवताओं के प्रति लोगों की आस्था से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मेलों से लोगों को एक साथ बैठने का मौका मिलता है और भाईचारा बढ़ता है। सिण्डोली सरपंच बद्रीनारायण मीना, सीताराम झेरा, रामकिशोर तलावड़ा, प्रेमप्रकाश कटारा, राधेश्याम निमड्या सहित पूरी सेवा समिति ने मेले की व्यवस्थाएं संभालीं। 32 साल से लगातार आयोजित हो रहा यह मेला हर साल और भी विशाल होता जा रहा है। मंगलवार रात हुए इस कार्यक्रम के बाद अगले साल मेले में और अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

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