शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता विक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब सरकार, पुलिस प्रशासन और जेल विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य में राजनीतिक नेताओं, पुलिस और जेल प्रशासन की मिलीभगत से एक गठजोड़ चल रहा है। उन्होंने न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी जितेंद्र सिंह के नौ दिन तक जेल नहीं पहुंचने, अस्पताल में भर्ती रहने और चंडीगढ़ के एक निजी होटल में ठहरने के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मजीठिया ने दस्तावेजों और वीडियो का हवाला देते हुए दावा किया कि आरोपी को 30 तारीख को अमृतसर की अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, लेकिन वह नौ तारीख तक जेल नहीं पहुंचा। उन्होंने सवाल उठाया कि इस दौरान आरोपी कहां रहा और उसे जेल से बाहर रखने का आधार क्या था। मजीठिया के अनुसार, आरोपी को नौ तारीख को गुरु नानक देव अस्पताल, अमृतसर में भर्ती कराया गया, जहां वह 15 तारीख तक रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी आरोपी जेल जाने के बजाय 17 तारीख तक चंडीगढ़ के होटल हैवन में ठहरा रहा। इसके बाद उसे रात करीब 3:20 बजे पीजीआई ले जाया गया, जहां कथित तौर पर गंभीर बीमारी नहीं होने के कारण भर्ती नहीं किया गया। आरोपी से हथियार और कारतूस मिलने का दावा मजीठिया ने दावा किया कि आरोपी के पास से चंडीगढ़ में एक हथियार, दो मैगजीन और 36 से अधिक जिंदा कारतूस बरामद हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि न्यायिक हिरासत में रहने के दौरान आरोपी तक हथियार कैसे पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी को अस्पताल और होटल में वीआईपी सुविधाएं दी गईं तथा आम आदमी पार्टी के नेताओं सहित प्रभावशाली लोग उससे मिलने आते रहे। एसएसपी समेत अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग अकाली नेता ने अमृतसर देहाती के एसएसपी कंवलप्रीत सिंह चाहल, डीएसपी मजीठा कमलमीत सिंह उर्फ बकरा और थाना कथूनंगल के एसएचओ समेत अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी को निजी गाड़ियों में घुमाया गया और विशेष सुविधाएं दी गईं। मजीठिया ने मामले की जांच सीबीआई या चंडीगढ़ पुलिस से करवाने, संबंधित अधिकारियों को पद से हटाने और दोष साबित होने पर बर्खास्त करने की मांग की। उन्होंने हाईकोर्ट और मुख्य न्यायाधीश से भी मामले में संज्ञान लेने की अपील की।