ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन की 83वीं वर्षगांठ रविवार को श्री अकाल तख्त साहिब में मनाई गई। इस मौके पर फेडरेशन की मौजूदा लीडरशिप, पदाधिकारियों और पुराने सदस्यों ने एकत्र होकर पंथ की चढ़दी कला और सरबत के भले के लिए अरदास की। कार्यक्रम के दौरान फेडरेशन के इतिहास और सिख कौम व पंजाब के लिए किए गए संघर्षों को याद किया गया। सिख नेता करनैल सिंह पीर मोहम्मद ने कहा कि 13 सितंबर 1943 को 13 विद्यार्थियों ने फेडरेशन की नींव रखी थी। इसके बाद संगठन ने सिख कौम और पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संघर्ष करते हुए युवाओं को गुरमत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि फेडरेशन से जुड़े कई नेताओं और सदस्यों ने पंथ के लिए अहम योगदान दिया है। पीर मोहम्मद ने कहा कि कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए। पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंथ की प्रतिनिधि जमात है और उसे किसी अन्य दल के साथ गठबंधन करने के बजाय अपने बलबूते पर एकजुट होकर सरकार बनाने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने 2 दिसंबर के हुक्मनामे को ध्यान में रखते हुए अकाली दल में एकता की जरूरत बताई। एसजीपीसी सदस्य मनजीत सिंह ने कहा कि फेडरेशन हमेशा सिख कौम की अलग पहचान और अस्तित्व की बात करती रही है। उन्होंने कहा कि संगठन ने कई विद्वान, नेता और विभिन्न क्षेत्रों में नाम कमाने वाली शख्सियतें तैयार की हैं। फेडरेशन के अध्यक्ष कवर चढ़त सिंह ने कहा कि संगठन की ओर से गुरमत प्रचार कैंप लगाने के साथ युवाओं को उनके अधिकारों और पंथक मुद्दों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के कठिन दौर में भी फेडरेशन ने संघर्ष किया और कई सदस्यों ने पंथ के लिए शहादतें दीं।