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खरगोन में 292 साल पुरानी अनोखी परंपरा: बाकी माता मंदिर में पुरुष करते हैं गरबा, महिलाएं गाती हैं गीत

Wed, 14 Oct 2026 03:58 PM IST
खरगोन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन

यूं तो नवरात्रि में गरबा और डांडिया की धूम देशभर में देखने को मिलती है लेकिन प्रदेश के खरगोन शहर में स्थित बाकी माता मंदिर की परंपरा इसे खास बनाती है। यहां पिछले 292 वर्षों से पुरुष गरबा करते आ रहे हैं, जबकि महिलाएं चौपाल पर बैठकर पारंपरिक गरबा गीत गाती हैं। आस्था, परंपरा और लोक संस्कृति का यह अनूठा संगम खरगोन की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

शहर के एमजी रोड स्थित त्रिवेणी परिसर में बाकी माता का मंदिर है। यहां देवी पीपल के वृक्ष के साथ नौ माताओं के गोलाकार स्वरूप में विराजमान हैं। मंदिर परिसर के मुख्य चबूतरे पर नौ देवियों के साथ भगवान शिव, अष्ट भैरव और हनुमानजी भी स्थापित हैं। नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की परंपरा के अनुसार संस्थापक भटामभट्ट दादा को स्वप्न में देवी के दर्शन हुए थे। इसके बाद परिसर में स्थित पवित्र झिरे यानी कुएं के शीतल जल से माता की प्रतिमाएं स्वतः प्रकट हुईं। इन प्रतिमाओं को चबूतरे पर स्थापित किया गया। तभी से यहां पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जा रहा है।

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बाकी माता मंदिर की सबसे खास पहचान यहां होने वाला पुरुष गरबा है। नवरात्रि के दौरान पुरुष पारंपरिक तरीके से गरबा करते हैं। वहीं महिलाएं चौपाल पर बैठकर करीब 150 वर्ष पुराने पारंपरिक गरबा गीत गाती हैं। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रही है। बदलते समय में भी इस आयोजन ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी है। मंदिर में सुबह तड़के कुएं के पवित्र जल से स्नान कर गीले कपड़ों में माता की पूजा करने की भी परंपरा है। श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि इस तरह पूजा करने से त्वचा संबंधी रोगों और शारीरिक कष्टों से राहत मिलती है। हालांकि यह धार्मिक मान्यता है और इसका कोई चिकित्सकीय प्रमाण यहां उपलब्ध नहीं है।

बाकी माता मंदिर की परंपरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। यह निमाड़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक गीतों और सामुदायिक सहभागिता का भी उदाहरण है। देश के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि मनाने के तरीके अलग हैं, ऐसे में खरगोन का यह मंदिर अपनी विशिष्ट परंपरा के कारण विशेष महत्व रखता है।

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