खंडवा में स्वामित्व योजना के अंतर्गत चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। यहां एक पटवारी ने गांव के 51 प्लॉट की रजिस्ट्री अपने और अपनी पत्नी के नाम कर डाली। कांग्रेस पार्टी द्वारा मामले का खुलासा और शिकायत करने के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल जांच कराई गई और अब पटवारी को निलंबित कर उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। मामला खंडवा जिले की कोलगांव पंचायत का है। इधर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने दोषी पटवारी के साथ ही इस मामले में संबंधित तहसीलदार और एसडीएम की मिलीभगत होने और पूरे प्रदेश में ऐसे मामले होने की भी आशंका जताई है।
51 में से तीन पट्टे पत्नी के नाम
मामले का खुलासा तब हुआ, जब प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर को स्वामित्व योजना का शुभारंभ होना था। इसके ठीक एक दिन पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तमपाल सिंह पुरनी ने जिला कलेक्टर से दस्तावेजों के साथ ग्राम कोलगांव के पटवारी राजेश मंडलोई के खिलाफ शिकायत की। उत्तमपाल सिंह का आरोप था कि योजना में पट्टा वितरण पर पटवारी द्वारा रजिस्ट्री करने को कहा गया है। लेकिन कोलगांव पंचायत के पूर्व पटवारी ने 48 पट्टे खुद और तीन पट्टे अपनी पत्नी मनीषा पति राजेश के नाम करा लिए हैं। यह योजना के शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। इसमें जो एसडीएम और तहसीलदार हैं, उनकी भी मिलीभगत की आशंका है।
कमेटी बनाकर पूरे प्रदेश में कराई जाए जांच
यही नहीं, शिकायत में कांग्रेस पार्टी ने मांग की थी कि इस एक गांव के अलावा पूरे जिले और पूरे मध्य प्रदेश में ऐसे मामले हो सकते हैं। इसलिए इसकी एक कमेटी बनाकर जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का कहना था कि एक गांव में ही 51 पट्टे किसी पटवारी के नाम हो रहे हैं तो कहीं न कहीं राजस्व विभाग के और भी लोग इसमें सम्मिलित होंगे। उनका कहना था कि जो हकदार लोग हैं, जिन्हें पट्टा मिलना चाहिए, वे लोग इससे वंचित रह गए तो इसमें सरकार की भी खामी है। इसकी इंक्वायरी कर दोषियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच होनी चाहिए, जिससे आगे ऐसे और मामले न बढ़ें।
ये भी पढ़ें- बैतूल में संक्रामक बुखार का बढ़ा प्रकोप: अस्पताल की ओपीडी में उमड़े मरीज, रोज 1200 से अधिक पहुंच रहे लोग
जांच के बाद दोषी पटवारी निलंबित
वहीं, इस मामले में खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता का कहना है कि एक मामला उनके संज्ञान में आया था, जिसमें स्वामित्व योजना के अंतर्गत एक पटवारी ने गांव में स्वामित्व के जो प्लॉट थे, उनमें से बहुत सारे प्लॉट स्वयं के नाम और कुछ प्लॉट अपने परिवार वालों के नाम कर लिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि इसकी जांच में शिकायत सही पाई गई। इसके बाद उस पटवारी को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।