तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एक तय समयसीमा में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से कहा है कि टीएमसी के दो विरोधी गुटों के बीच चल रहे नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के विवाद पर फैसला किया जाए। दोनों गुटों को अपनी दलीलें पूरी करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया है और इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा।
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को टीएमसी के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवाद पर अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दोनों विरोधी गुटों को निर्देश दिया कि वे चुनाव आयोग के सामने चल रही कार्यवाही में चार हफ्ते के भीतर अपनी दलीलें पूरी करें। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर इस विवाद पर फैसला करना होगा।
मामला टीएमसी के पारंपरिक नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार का है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ममता बनर्जी की उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले को चुनौती दी थी। चुनाव आयोग ने 17 सितंबर के अपने अंतरिम आदेश में कहा था कि दोनों गुट ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित ‘फूल और घास’ चिन्ह का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
दरअसल, चुनाव आयोग के सामने टीएमसी के भीतर दो विरोधी गुटों का दावा है। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। आयोग ने कहा था कि दोनों पक्ष खुद को मूल पार्टी बताते हैं और इसलिए चुनाव चिह्न आवंटन आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत इस विवाद पर ठोस फैसला जरूरी है।
इसी वजह से आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को मूल नाम और चिन्ह के इस्तेमाल से रोक दिया। साथ ही दोनों को अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह चुनने की व्यवस्था दी गई। अक्टूबर में होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह मिला, जबकि अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और लिफाफा चिन्ह आवंटित किया गया।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनकी याचिका में मूल पार्टी नाम और पारंपरिक चुनाव चिन्ह को फ्रीज करने के फैसले पर सवाल उठाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले हफ्ते सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग से यह भी पूछा था कि वह इस विवाद का अंतिम निपटारा कितने समय में कर सकता है।
सोमवार के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के अंतिम निपटारे के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है। पहले दोनों पक्षों को चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें और दस्तावेज पेश करने होंगे। इसके लिए चार हफ्ते का समय है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा। यानी अब विवाद को अनिश्चित समय तक लंबित रखने की गुंजाइश कम हो गई है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के मूल मुद्दे पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। यानी अभी यह तय नहीं हुआ है कि टीएमसी का नाम और ‘फूल और घास’ चिन्ह किस गुट को मिलेगा। अदालत ने दोनों पक्षों को अपनी दलीलें चुनाव आयोग के सामने रखने का मौका दिया है और अंतिम फैसला चुनाव आयोग को ही करना है।
अब नजर चुनाव आयोग की आगे की कार्यवाही पर रहेगी। चार हफ्ते में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद आयोग के सामने दस्तावेज, दावे और दोनों गुटों की ओर से पेश किए जाने वाले सबूत होंगे। इन्हीं के आधार पर आयोग को अपना फैसला देना होगा। फिलहाल उपचुनावों के लिए दोनों गुट अलग नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में हैं।
यानी टीएमसी के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट से तय समयसीमा के साथ चुनाव आयोग के पास लौट गई है। चार हफ्ते में दलीलें और उसके बाद तीन महीने में फैसला। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग की अंतिम सुनवाई और दस्तावेजी प्रक्रिया के बाद इस बड़े विवाद पर क्या निर्णय आता है।