उत्तर प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव के बहाने बीजेपी ने बड़ा दांव चला है। यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। लेकिन इस पूरी सूची में दो नाम ऐसे हैं, जिनकी चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है। ये नाम हैं बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत और बरेली की श्रुति गंगवार। बीजेपी की इस सूची में दोनों महिला चेहरों को जगह मिली है और यही वजह है कि पार्टी के चयन को सामाजिक समीकरण के साथ-साथ महिला प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
बीजेपी ने जिन आठ नेताओं को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है, उनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। पार्टी की सूची में तीन ओबीसी, दो अनुसूचित जाति और तीन सामान्य वर्ग के उम्मीदवार हैं। यानी उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन साधने की कोशिश दिखाई देती है। लेकिन इन आठ नामों में दो महिला चेहरों को आगे लाना इस सूची का खास पहलू है।
सबसे पहले बात प्रियंका सिंह रावत की। बीजेपी ने बाराबंकी की पूर्व सांसद को एक बार फिर बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी दी है। प्रियंका सिंह रावत साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बाराबंकी से जीतकर महज 28 साल की उम्र में संसद पहुंची थीं। उस वक्त वह बीजेपी के युवा दलित चेहरों में तेजी से उभरकर सामने आई थीं।
प्रियंका ने राजनीति विज्ञान में एमए की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने मास कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी किया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बाराबंकी से उपेंद्र सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया और प्रियंका दोबारा संसद नहीं पहुंच सकीं। लेकिन चुनावी हार के बाद भी उनका संगठन में सक्रिय सफर जारी रहा।
यानी लोकसभा का टिकट नहीं मिला, लेकिन संगठन में जिम्मेदारियां मिलती रहीं। बीजेपी की प्रदेश इकाई में प्रियंका रावत ने अहम भूमिकाएं निभाईं। जून 2026 में यूपी बीजेपी की नई प्रदेश टीम के ऐलान में उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले वह प्रदेश महामंत्री की भूमिका में थीं।
अब राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर बीजेपी ने प्रियंका रावत को राष्ट्रीय राजनीति में वापसी का मौका दिया है। यही वजह है कि उनके नाम को संगठन और जमीनी राजनीति से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए भी अहम संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की ओर से एक महिला और दलित चेहरे को आगे बढ़ाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
अब आते हैं दूसरे महिला चेहरे पर- श्रुति गंगवार। इससे पहले की आपको इनके बारे में बताऊँ, पहले सुनिए श्रुति गंगवार ने उम्मीदवार बनाए जाने पर क्या कहा।
श्रुति गंगवार का नाम सामने आते ही बरेली की राजनीति और बीजेपी के दिग्गज नेता संतोष गंगवार का जिक्र भी होता है। श्रुति, बीजेपी के वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार की बेटी हैं। संतोष गंगवार बरेली से आठ बार सांसद रह चुके हैं, केंद्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल हैं।
हालांकि श्रुति गंगवार की अपनी राजनीतिक पहचान भी है। वह बरेली में बीजेपी के कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय रही हैं। इसके अलावा वह अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन भी हैं। पिछले कुछ समय से बरेली क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता चर्चा में रही है।
प्रधानमंत्री के 12 साल के कार्यकाल से जुड़े बीजेपी के अभियान के दौरान भी श्रुति गंगवार पार्टी के कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आई थीं। इन कार्यक्रमों के जरिए केंद्र सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई थी।
बीजेपी की ओर से जारी आठ नामों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं. इनमें प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार महिला उम्मीदवार हैं.
बीजेपी की इस सूची में महिलाओं की हिस्सेदारी आठ में दो है. दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि अलग है. प्रियंका सिंह रावत चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंच चुकी हैं, जबकि श्रुति गंगवार का राजनीतिक परिचय बीजेपी के वरिष्ठ नेता संतोष गंगवार के परिवार और उत्तर प्रदेश बीजेपी में उनकी सक्रियता से जुड़ा है.
महिला प्रतिनिधित्व के साथ बीजेपी ने उम्मीदवारों की सूची में सामाजिक समीकरण का भी ध्यान रखा है. सूची में 3 ओबीसी, 2 एससी और 3 सामान्य वर्ग के चेहरे हैं. ओबीसी में लोधी, पाल और कुर्मी प्रतिनिधित्व बताया गया है, जबकि सामान्य वर्ग में दो ब्राह्मण और एक राजपूत चेहरा शामिल है.
अब बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर एक बड़ा राजनीतिक मंच देने का फैसला किया है। यानी एक तरफ प्रियंका सिंह रावत संगठन में लंबे समय से सक्रिय महिला और दलित चेहरा हैं, तो दूसरी तरफ श्रुति गंगवार बरेली की राजनीति में सक्रिय युवा महिला चेहरा हैं।
दोनों के राजनीतिक सफर अलग हैं, लेकिन राज्यसभा की एक ही सूची में दोनों का नाम आना यूपी बीजेपी की रणनीति के लिहाज से अहम है। एक ओर पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है, तो दूसरी ओर महिला प्रतिनिधित्व को भी जगह दी है।
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से बीजेपी के लिए सात सीटों पर जीत की राह आसान मानी जा रही है, जबकि आठवें उम्मीदवार के लिए पार्टी को अतिरिक्त समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ सकती है। समाजवादी पार्टी दो सीटों पर अपने उम्मीदवारों को जिता सकती है। अगर कोई तीसरा उम्मीदवार मैदान में आता है, तो मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
नामांकन की आखिरी तारीख मंगलवार है। ऐसे में बीजेपी ने नामों का ऐलान कर चुनावी तस्वीर साफ कर दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्यसभा की इस सूची के जरिए बीजेपी यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक, महिला और संगठनात्मक समीकरणों को किस तरह आगे बढ़ाती है।
फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है- बीजेपी ने यूपी से राज्यसभा के लिए आठ नए चेहरों को मौका दिया है और इनमें दो महिला चेहरे खास हैं। प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार के जरिए पार्टी ने संगठन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और महिला भागीदारी, तीनों को एक साथ साधने की कोशिश की है।